लखनऊ : 06 नवम्बर, 2026
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि रूल ऑफ लॉ स्थापित करना, हर पीड़ित को समयबद्ध न्याय दिलाना, अपराधी चाहे कितना भी शक्तिशाली हो, उसे सजा दिलाना और किसी भी निर्दोष का उत्पीड़न न होने देना प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली की मूल भावना है। न्याय के मन्दिर में ’सत्यमेव जयते’ की उक्ति को सिद्ध करने के लिए प्रत्यक्ष, सटीक और वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत करना अनिवार्य है। यदि पुलिस प्रणाली न्याय दिलाने के मार्ग की महारथी है, तो फॉरेंसिक अधिकारी उस व्यवस्था के ’सारथी’ हैं। फॉरेंसिक अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी, शुद्धता और समयबद्धता के साथ निभानी होगी, ताकि तारीख-दर-तारीख की परम्परा समाप्त हो सके।
मुख्यमंत्री जी आज यहांँ अपने सरकारी आवास पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित 28 वैज्ञानिक अधिकारियों के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने नवचयनित वैज्ञानिक अधिकारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए।
मुख्यमंत्री जी ने नवनियुक्त अधिकारियों एवं उनके परिजनों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह नियुक्ति पत्र केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि पूरे परिवार के विश्वास और खुशी का प्रतीक है। साक्षात्कार सम्पन्न होने के शाम तक परिणाम जारी होने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह चयन प्रक्रिया राज्य सरकार की प्रशासनिक शुचिता को दर्शाती है। अभ्यर्थियों को किसी सिफारिश, लेन-देन या गलत रास्ते की आवश्यकता नहीं पड़ी। उनकी योग्यता और मेरिट ही उनके चयन का आधार बनी है। जिस पारदर्शिता से उनका चयन हुआ है, उसी ईमानदारी से वे पीड़ित को न्याय और अपराधी को सजा दिलाने में अपनी भूमिका का निर्वहन करें।
मुख्यमंत्री जी ने महर्षि गौतम के न्याय दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय मनीषा में प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द प्रमाणों की महत्ता हजारों वर्ष पूर्व ही स्थापित कर दी गई थी। ’यत्र यत्र धूमः, तत्र तत्र अग्निः’ के सिद्धान्त की भांति आज फॉरेंसिक वैज्ञानिक भी उंगलियों के निशान, रक्त के नमूने, बाल, डी0एन0ए0 अवशेष और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक अपराधियों तक पहुँचने का कार्य करते हैं।
जुलाई, 2024 से देश में लागू 03 नये आपराधिक कानूनों में 07 वर्ष से अधिक सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य संकलन को अनिवार्य किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने कानून लागू होने से पूर्व ही दूरदर्शी सोच के साथ ’उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट’ की स्थापना की। राज्य को 500 विशेषज्ञों की आवश्यकता थी, जिसके सापेक्ष सरकार ने 600 से अधिक फॉरेंसिक साक्ष्य संकलित करने वाले पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षित कर फील्ड में तैनात किया है।

मुख्यमंत्री जी ने उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की स्थापना की पृष्ठभूमि साझा करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पूर्व लखनऊ एयरपोर्ट के पास स्थित इस बहुमूल्य सरकारी भूमि पर एक भू-माफिया का अवैध कब्जा था। राज्य सरकार ने कठोर कार्रवाई कर भूमि को मुक्त कराया और वहाँ इस विश्वस्तरीय संस्थान का निर्माण कराया। आज यह संस्थान ए0आई0, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी, क्वाण्टम फॉरेंसिक और फॉरेंसिक साइंसेज में डिग्री व डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित करने वाला प्रमुख केन्द्र बन चुका है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि विगत साढ़े नौ वर्षों में पारदर्शी प्रक्रिया के तहत 02 लाख 30 हजार से अधिक पुलिस कार्मिकों की भर्ती कर उत्तर प्रदेश पुलिस को दुनिया की सबसे बड़ी सिविल पुलिस के रूप में स्थापित किया गया है। जिस राज्य को कभी उपद्रव, अराजकता, कर्फ्यू और अपराधियों के बेखौफ घूमने के कारण ’बीमारू’ और बॉटम-5 राज्यों में गिना जाता था, आज वही उत्तर प्रदेश, देश की टॉप-3 अर्थव्यवस्था में शामिल है।

राज्य सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियाँ प्रदान की हैं। सरकार द्वारा आगामी 06 महीनों में 01 लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। आज का कार्यक्रम इसी श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी (छठा कार्यक्रम) है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश पुलिस बल का एक और वृहद नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम भी सम्पन्न होने जा रहा है।
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि नवचयनित युवा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में न्याय के साक्षी और सहभागी बने। युवाओं के मन में सदैव कर्तव्यनिष्ठ होने की भावना होनी चाहिए। उनकी बुनियादी आवश्यकताओं, प्रशिक्षण या उपकरण की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। पुलिस विभाग की उपलब्धियों के परिणामस्वरूप प्रदेश में सुरक्षा का माहौल बना है। देश-दुनिया यहाँ की कानून-व्यवस्था का उदाहरण देती है। वर्ष 2017 के उपरान्त जनपद गाजियाबाद, प्रयागराज, गोरखपुर, झाँसी, अलीगढ़, कन्नौज एवं गोण्डा में संचालित प्रयोगशालाओं सहित आज 12 प्रयोगशालाएँ क्रियाशील हो चुकी हैं। यह न्याय की दिशा में अत्यन्त सराहनीय कदम है। क्योंकि न्याय का स्पष्ट सिद्धान्त है कि जितनी जल्दी न्याय हो सके, वह सभी के लिए अच्छा है। न्याय में देरी कहीं न कहीं अन्याय की परिधि में आती है।
इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कृष्ण, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री, गृह एवं सूचना श्री संजय प्रसाद, अपर पुलिस महानिदेशक तकनीकी सेवाएँ श्री भगवान स्वरूप श्रीवास्तव सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, नवनियुक्त वैज्ञानिक अधिकारी उपस्थित थे।
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