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सुरेन्द्र अग्निहोत्री

गाजियाबाद,दिनांकः 21 अक्टूबर, 2026

केंद्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तत्वावधान में और प्रदेश सरकार द्वारा ‘मिशन शक्ति‘ के ‘सामर्थ्य‘ घटक के अंतर्गत संचालित प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (च्डडटल् 2ण्0) गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य व पोषण को सुदृढ़ करने का सशक्त माध्यम सिद्ध हो रही है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) पर आधारित इस कल्याणकारी पहल का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान होने वाले मजदूरी के नुकसान की आंशिक भरपाई करना और महिलाओं को आवश्यक आराम व समुचित पोषण उपलब्ध कराना है।
जनपद गाजियाबाद में इस योजना का क्रियान्वयन अत्यंत प्रभावी ढंग से किया जा रहा है, जहां जिला प्रशासन के सतत मार्गदर्शन में समाज के अंतिम पायदान पर स्थित पात्र महिलाओं तक समयबद्ध आर्थिक सहायता पहुंचाई जा रही है। यह योजना न केवल मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में सहायक बन रही है, बल्कि समय पर प्रसव पूर्व जांच (एएनसी), संस्थागत प्रसव तथा नवजात के पूर्ण टीकाकरण को भी जन आंदोलन का रूप दे रही है।
योजना के धरातलीय प्रभाव का प्रत्यक्ष उदाहरण जनपद गाजियाबाद के कौशाम्बी क्षेत्र की निवासी श्रीमती रीतू शुक्ला (पत्नी श्री मनोज कुमार) के अनुभव में दिखाई देता है। पहली बार मां बनने के दौरान परिवार की सीमित आर्थिक स्थिति के कारण वह गर्भावस्था से जुड़े अतिरिक्त चिकित्सा एवं पोषण व्यय को लेकर अत्यंत चिंतित थीं। परिवार के लिए नियमित दवाओं, संतुलित आहार और आवश्यक चिकित्सकीय जांचों का खर्च वहन करना उनके लिए एक चुनौती बना हुआ था।
ऐसे समय में क्षेत्र की स्थानीय आंगनवाड़ी कार्यकत्री ने गृह भ्रमण के दौरान उनसे संपर्क साधा और उन्हें केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी। कार्यकत्री के सक्रिय सहयोग से रीतू शुक्ला का आवश्यक प्रपत्रों के साथ योजना के पोर्टल पर त्वरित पंजीकरण कराया गया। इसके उपरांत निर्धारित समयावधि में प्रथम प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) पूर्ण होते ही उनके बैंक खाते में ₹3,000 की पहली किस्त सीधे अंतरित कर दी गई।
इस आरंभिक आर्थिक सहयोग से रीतू को गर्भावस्था के नाजुक दौर में फल, हरी सब्जियां, दूध और पोषण संबंधी अन्य जरूरी वस्तुएं जुटाने में महत्वपूर्ण संबल मिला। इसके पश्चात संस्थागत प्रसव और नवजात शिशु के जन्म पंजीकरण सहित प्राथमिक टीकाकरण चक्र (बीसीजी, ओपीवी, डीपीटी एवं हेपेटाइटिस-बी) पूर्ण होने पर उन्हें ₹2,000 की दूसरी किस्त भी डीबीटी के माध्यम से सुगमता से प्राप्त हो गई।
आर्थिक चिंताओं से मुक्त होकर मातृत्व का सुख प्राप्त करने वाली रीतू शुक्ला आज एक स्वस्थ बच्ची की मां हैं। उन्होंने इस जीवनोपयोगी सहायता के लिए केंद्र सरकार एवं प्रदेश सरकार के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है। अब वह अपने क्षेत्र की अन्य गर्भवती महिलाओं को भी समय से पंजीकरण कराने और स्वास्थ्य केंद्रों पर नियमित जांच कराने के लिए जागरूक व प्रेरित कर रही हैं।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना 2.0 के संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, पहले जीवित बच्चे के जन्म पर पात्र धात्री महिला को दो किस्तों में कुल ₹5,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसमें गर्भावस्था के समय पर पंजीकरण एवं न्यूनतम एक प्रसव पूर्व जांच पर ₹3,000 तथा शिशु के जन्म पंजीकरण व 14 सप्ताह तक के प्राथमिक टीकाकरण चक्र के पूर्ण होने पर ₹2,000 की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है।
इसके साथ ही, समाज में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने तथा लिंगानुपात में व्यापक सुधार लाने के उद्देश्य से योजना में विशेष प्रावधान जोड़ा गया है। यदि लाभार्थी की दूसरी संतान बालिका होती है, तो महिला को प्रसव उपरांत ₹6,000 की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। यह व्यवस्था कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम और बालिका शिक्षा व स्वास्थ्य की नींव को मजबूत करने में ऐतिहासिक भूमिका निभा रही है।
जनपद गाजियाबाद में योजना को शत-प्रतिशत संतृप्त करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार (आईसीडीएस) विभाग के मध्य सुदृढ़ अंतर्विभागीय समन्वय स्थापित किया गया है। जनपद के घने शहरी क्षेत्रों, औद्योगिकीकृत बस्तियों तथा ग्रामीण विकास खंडों में कार्यरत आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को विशेष दायित्व सौंपे गए हैं, जिससे कोई भी पात्र महिला जानकारी के अभाव में लाभ से वंचित न रहे।
जनपद के प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित होने वाले ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) और नगरीय स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस (यूएचएनडी) के अवसरों पर विशेष पंजीकरण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इन सत्रों में गर्भवती महिलाओं की हीमोग्लोबिन जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था (एचआरपी) की पहचान और टीकाकरण के साथ-साथ योजना के फॉर्म ऑनलाइन भरवाने की व्यवस्था की गई है।
योजना की संपूर्ण प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी, सुरक्षित और बिचौलिया-मुक्त बनाने के लिए अत्याधुनिक ‘पी.एम.एम.वी.वाई. सॉफ्ट पोर्टल‘ का उपयोग किया जा रहा है। इसमें आधार-आधारित अधिप्रमाणन और राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों का त्वरित सत्यापन किया जाता है। वित्तीय सहायता सीधे लाभार्थी के आधार-सीडेड बैंक अथवा डाकघर खाते में अंतरित होती है, जिससे धनराशि के दुरुपयोग की कोई संभावना नहीं रहती।
जिला प्रशासन द्वारा जनपद स्तर पर योजना की प्रगति, आवेदनों के सत्यापन और भुगतान की स्थिति की नियमित समीक्षा की जा रही है। पोर्टल पर दर्ज होने वाले डाटा का रीयल-टाइम अनुश्रवण सुनिश्चित किया गया है, ताकि यदि किसी लाभार्थी के बैंक खाते अथवा प्रपत्रों में कोई तकनीकी त्रुटि सामने आए, तो विभागीय कर्मी तत्काल घर जाकर उसका निराकरण करा सकें।
मातृत्व और शिशु कल्याण के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का प्रभाव केवल नकद हस्तांतरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं में स्वास्थ्य के प्रति व्यवहारिक परिवर्तन ला रही है। समय पर जांच और संस्थागत प्रसव से प्रसवकालीन जटिलताओं में भारी कमी आई है, वहीं नियमित टीकाकरण से बच्चों में संक्रामक रोगों का खतरा न्यूनतम हुआ है।
केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार की यह लोक-कल्याणकारी पहल मातृत्व को सम्मान और सुरक्षा प्रदान करने का सशक्त माध्यम बनी है। जिला प्रशासन के समर्पित प्रयासों से गाजियाबाद जनपद में यह योजना निर्धन और वंचित परिवारों की महिलाओं के जीवन में नई आशा, बेहतर स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता का संचार कर रही है।

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