संकलन – भीष्म कुकरेती
भवन , संख्या – 897
( काष्ठ कला पर केंद्रित )
चमोली-गढ़वाल की उर्गम , नीति घाटियों में भवनों की काष्ठ कला गढ़वाल के अन्य भागों से विशिष्ट हैं। हिमाच्छादित क्षेत्र होने के कारण भवनों में लकड़ी का उपयोग अधिक होने से भवन उत्तरकाशी के उत्तरी भाग हरसिल जैसे हैं। – गाँव, ब्लॉक , जनपद – गमशाली/गमसैली , नीति घाटी, चमोली। भवन का प्रकार अर्थात पुर (Floor) व खंड – दुपुर , दुखंड या तिभित्या भवन में काष्ठ कला समीक्षा हेतु मुख्य अंग – जंगला काष्ठ कला की दृष्टि से भवन का जंगला महत्वपूर्ण है और जंगले के कारण ही भवन विशिष्ट बन पड़ा है। धारण (शहतीर ) में कटाई ज्यामितीय कटान से हुई किन्तु सम्पूर्ण दृष्टि से कलात्मक व आकर्षक रही होगी। – जंगले की जानकारी -जंगले तीन स्तर के हैं। निम्न स्तर (layer ) में स्तम्भ (columns ) पत्ती (wood plates ) खड़ी हैं जो ज्यामितीय अलंकरण के हैं। द्वितीय स्तर में स्तम्भ निम्न स्तर से बड़े हैं व हुक्के की नई (shaft ) जैसे हैं। मुख्य जंगला तृतीय स्तर पर है जैसा कि विवरण निम्न है –जंगले का तल/floor – पहले तल पर
छज्जा प्रकार (काष्ठ या पाषाण) – काष्ठ
दिशांए जस ओर स्तम्भ हैं – भवन के सामने जंगले में स्तम्भ संख्या – १५ से अधिक जंगले के स्तम्भों में कला – नीचे आधार ऊपर तीन घट निर्मित हैं , ऊपर भी घट कटे हैं। ये घट आकर्षण बढ़ाने में सफल हुए हैं। जंगले के आधार पर उप-जंगले/रेलिंग जंगला / रेलिंग विवरण -रेलिंग स्तम्भ खड़े हुक्के के नई (wood shaft ) जैसे आकर्षक हैं। जंगले के तोरणम व छपरिका की कला चर्चा – तोरणम नहीं हैं
विशेष विशेषता/Exclusivity – भवन आकर्षक भव्य कसम में आता है निष्कर्ष – ज्यामितीय व कुछ जगह प्राकृतिक अलंकरण सूचना व फोटो आभार
: जगत पाल

