जौहर

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सुनो उन विधवा रानियों की चीत्कार

 जो जली मुगलो से बचने करती हाहाकार।

सुनो उस कटी घाटी की करूण पुकार

जिसे छल से काटा हुआ जौहर जुहार।

कवि अग्निवेद

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