यदा शरीराणिःनवानि देहि के सिद्धांत का पालन करते हुए नूतन कहानियां अपने अतीत के रूप रंग को त्याग कर नयी साहित्य, संस्कृति, कला की पत्रिका बनने के लिए नए रूप में आपको सौंप रहे है।परिवर्तन प्रकृति का नियम है, जिससे हम और आप सभी बंधे है।नूतन कहानियाँ साहित्य की धरती, धर्म की नगरी तीर्थ राज प्रयाग की पावन धरा से साहित्य, संस्कृति, कला की दुनिया में प्रवेश के अवसर पर अपनी वचनबद्धता पाठको के मनोकूल बदलाव के वक्त में कदम से कदम मिलाकर चलने की है।मूल्यों के परिवर्तन के साथ-साथ साहित्य की सृष्टि भी परिवर्तित होती है साहित्य का समाजशास्त्रीय अध्ययन इसका प्रमाण है। कलात्मक सृजन भाव-भूमि की नई अर्थवत्ता के साथ-साथ सौंदर्य चेतना की नई जीवन दृष्टि प्राप्त करता है। अतीत के धरातल पर ही वर्तमान फलता-फूलता है और भविष्य की ओर अभिमुख होता है ।साहित्य के इतिहास में अतीत जड और अविस्मरणीय नहीं रहता वह तो यह गवाक्ष ह,ै जिसमें वर्तमान का क्षितिज स्पष्ट दिखाई देता है।अरनेक्स्ट फिशर के शब्दों में कलाकार अपने युग के विचारों, पूर्वाग्रहों ,मूल्यबोध और वैचारिकता से अछूता और स्वाधीन नहीं रहता। उसका समय उसे गतिमान करता है, बनाता है और विकसित करता है। जायसी ने कहा-
तुरकी अरबी हिन्दुई भाषा जेति आहि।
जेहि मह मारगप्रेम का सबै सराहे ताहि।।
हिन्दी सचमुच ‘प्रेम का मारग‘ रही। हिन्दी दिवस के अवसर पर बदलाव के मार्ग पर राह चुनने के बीच अतीत के कुछ अंश पूरी तरह तिरेहित करना कठिन था,पाठकों के बीच घोषणा के साथ इस अंक में अंतिम बार एक अपराधिक कहानी प्रकाशित कर रहे हैं। भाषा वैज्ञानिक हमें शब्द देते हैं, लेकिन साहित्यकार उन शब्दों को चुनकर एक रचना को जन्म देते हैं। भाषा वैज्ञानिक वाक्य संरचना का ज्ञान कराते हैं, लेकिन साहित्यकार वाक्य का अर्थ सुरक्षित रखते हुए रचना में लालित्य पैदा करते हैं।
इस अंक के लिए रचना प्राप्त करने से लेकर चयन और प्रकाशन के बीच भारत रत्न भारतीय राजनीति के चिरयुवा अटल बिहारी वाजपेयी चिरनिद्रा में सो चुके हैं, पर विश्वास नहीं हो रहा मौत से लड-झगडने की बात करने बाला युग नायक अब हमारे बीच नहीं है! हाथ कांप रहे हैं उनके बारे में कुछ लिखने में ।कलम के जादूगर और वाणी के संमोहनी अटल कितने बडे जन राजनेता थे जिनके बिरोधी भी अपने थे। दल नहीं दिल से रिश्ता बनाकर दलीय मतभेदों से उपर उठकर सबसे आत्मीयता का रिश्ता कायम रखते थे। मनुष्यता उनकी पहली पहचान थी । यही वह महान गुण था, जिसे अटल को सत्ता के शीर्ष पर भी अटल रहने देता था। अटल ही में वह कला थी, जिससे तीव्र वैचारिक मतभेद वाले राजनीतिक दलों के नेताओं में मतैक्य स्थापित कर उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक
गठबंधन कर एनडीए को खडा कर दिया।यह उन्हीं की ही मेहनत और तपस्या का फल है कि आज एनडीए देश पर राज कर रहा है। अटल में वाणी और लेखनी की कुव्वत कौन कहे, उनकी सहजता में भी जो भाव था, वह लोगों को सहज अपनी ओर आकर्षित करता था।जीवन भर की राजनीति में कभी किसी ने उनके मुख से धुर विरोधियों के लिए भी कटु शब्दों का प्रयोग नहीं सुना।अटल विहारी वाजपेयी के निधन पर नूतन कहानियां परिवार शोक व्यक्त करते हुए विशेष उल्लेख के रूप मे वरिष्ठ पत्रकार लगभग छै दषक से पत्रकारिता करने बाले इलाहाबादी श्याम कुमार का लेख प्रकाशित कर रहे है।नूतन कहानियाँ को साहित्य की महत्वपूर्ण पत्रिका बनाने के लिए रचनाकारों से आग्रह है कि अपनी रचना और बहुमूल्य सुझाव देकर सहयोग प्रदान करें। हिंदी में गद्य का विकास बहुत बाद में हुआ और इसने अपनी शुरुआत कविता के माध्यम से जो कि ज्यादातर लोकभाषा के साथ प्रयोग कर विकसित की गई। हिन्दी को समृद्ध करने वाली लोकभाषा बुन्देली,अवधी,मैथली,भोजपुरी,मालवी,बघेली,छत्तीसगढी में लिख रहे रचनाकार अपनी रचना प्रेषित करें।विख्यात कवि-लेखक उत्कृष्ट सृजन करने वाले साहित्यकारों के रचनाकर्म पर भविष्य में विशेषांक प्रकाषन करने की योजना हैं। सचेत बोध-शक्ति के वल पर प्राचीन और नवीन संचेतना के सार को चुन कर प्रस्तुत करने की कोषिष करेगें। पाठको के प्रति अपनी वचनबद्धता एक बार पुनः व्यक्त करते हुए अनुरोध है कि अपने पत्रों से अपने विचारों से अवगत कराये,ताकि साहित्य की अविरल गंगा बहती रहे….! राष्ट्रवाणी के अमर गायक राष्ट्रकवि पद्मश्री सोहन लाल द्विवेदी ने कहा था:-
मंै निशा बनकर तुम्हें सोने न दूंगा,
मैं उषा बनकर जगाने आ रहा हूूॅ।
आज अस्ताचल तुम्हंे जाने न दूंगा,
अरूण उदयाचल सजाने आ रहा हूॅ।
मैं विपथ होकर तुम्हंे मुडने न दूंगा।
प्रगति के पथ पर बढ़ाने आ रहा हूॅ।
हिन्दी दिवस की पावन वेला पर साहित्य की सेवा के लिए नूतन कहानियां आपकी सेवा में प्रस्तुत हैं।

