Spread the love

सुरेन्द्र अग्निहोत्री

लखनऊ, 5 नवंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित 28 वैज्ञानिक अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग की पारदर्शी एवं निष्पक्ष चयन प्रक्रिया के माध्यम से नियुक्त हुए वैज्ञानिक अधिकारियों की जिम्मेदारी अब यह सुनिश्चित करना है कि उनके पास आने वाले प्रत्येक फॉरेंसिक साक्ष्य की जांच पूरी शुद्धता, ईमानदारी और समयबद्धता के साथ हो। जिस निष्पक्षता और न्याय की अपेक्षा उन्होंने अपनी नियुक्ति प्रक्रिया में की थी, उसी निष्पक्षता के साथ प्रत्येक पीड़ित को न्याय दिलाने में अपनी भूमिका निभाएं। साक्ष्यों की विश्वसनीयता ही अपराधी को उसके अंजाम तक पहुंचाने और निर्दोष को सम्मान दिलाने का मजबूत आधार बनेगी। अपराधी कोई भी हो, उसे बचने का अवसर नहीं मिलना चाहिए, वहीं निर्दोष के सम्मान और अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

केवल योग्यता और मेरिट के आधार पर चयन हुआ
सीएम योगी ने कहा कि नियुक्ति पत्र केवल एक व्यक्ति को नहीं मिलता, बल्कि इससे पूरे परिवार की खुशियां जुड़ी होती हैं। इन वैज्ञानिक अधिकारियों का चयन शासन की शुचिता और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता का उदाहरण है। अभ्यर्थियों ने बताया कि उनका साक्षात्कार हुआ और उसी दिन शाम तक परिणाम घोषित कर दिया गया। न किसी सिफारिश की जरूरत पड़ी, न लेनदेन हुआ और न ही किसी अनुचित तरीके का सहारा लेना पड़ा। केवल योग्यता और मेरिट के आधार पर चयन हुआ। अब उनसे भी अपेक्षा है कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन इसी ईमानदारी से करें।

पुलिस भर्ती में पारदर्शिता से बदली प्रदेश की पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश पुलिस में 2.30 लाख से अधिक कार्मिकों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी शुचिता और पारदर्शिता के साथ संपन्न कराई गई है। आज उत्तर प्रदेश पुलिस दुनिया की सबसे बड़ी सिविल पुलिस के रूप में स्थापित है। एक समय प्रदेश में अराजकता, उपद्रव और कर्फ्यू आम बात थी। अपराधियों के मन में कानून का कोई भय नहीं था। उन्हें विश्वास था कि वे कानून के शिकंजे से बच निकलेंगे। सरकार ने पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक सुधार किए, जिसका परिणाम आज सामने है। देश में कानून-व्यवस्था की चर्चा होती है तो उत्तर प्रदेश का उल्लेख प्रमुखता से होता है। कभी बीमारू राज्य की श्रेणी में खड़ा प्रदेश आज आर्थिक रूप से देश के शीर्ष तीन राज्यों में शामिल है। यह इच्छाशक्ति, सक्षम मानव संसाधन और समर्पण भाव से किए गए कार्यों का परिणाम है।

साक्ष्यों की कमी से बच निकलते हैं अपराधी
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का ध्येय वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ है। न्याय के मंदिर में सत्य की विजय तभी संभव है, जब पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएं। भारतीय न्याय दर्शन में महर्षि गौतम ने प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द प्रमाण के चार प्रकार बताए हैं। हजारों वर्ष पहले प्रतिपादित यह ज्ञान आज की फॉरेंसिक जांच व्यवस्था में भी प्रासंगिक है। कई बार पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध होने के बावजूद विवेचना में कमियों के कारण अपराधी कानून के शिकंजे से बच निकलते हैं। उन्होंने एक दुर्दांत माफिया का उदाहरण देते हुए बताया कि उसके खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य होने के बावजूद वह अदालत से बरी हो गया था। उस समय यूपी एसटीएफ ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रस्तुत किए थे, लेकिन उन्हें प्रभावी ढंग से स्थापित करने में कमी रह गई। यह हमारी भी कमी थी कि हमने महर्षि गौतम के न्याय दर्शन को अपनी शिक्षा और व्यवस्था में पर्याप्त महत्व नहीं दिया। उनके द्वारा बताए गए प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द प्रमाण आज भी न्याय व्यवस्था में प्रासंगिक हैं। इसलिए वैज्ञानिक अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल साक्ष्य जुटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी प्रमाणिकता बनाए रखना और उन्हें इस तरह तैयार करना भी है कि अपराधी को सजा दिलाने में वे निर्णायक साबित हों।

वैज्ञानिक साक्ष्यों से अपराधियों तक पहुंचने में मिलेगी मदद
मुख्यमंत्री ने सहारनपुर में एक बालिका के जले हुए अवशेषों से प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक अपराधी तक पहुंचने का उदाहरण देते हुए कहा कि रक्त के नमूने, उंगलियों के निशान, बाल और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य अपराध की गुत्थी सुलझाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। फॉरेंसिक विशेषज्ञ न्याय व्यवस्था के महत्वपूर्ण सारथी हैं। पुलिस व्यवस्था न्याय दिलाने की दिशा में आगे बढ़ती है तो वैज्ञानिक अधिकारियों को साक्ष्यों के माध्यम से उसका मार्ग प्रशस्त करना होगा। इससे अपराधियों को सजा दिलाने के साथ न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब भी नहीं होगा।

नए आपराधिक कानूनों के अनुरूप तैयार की गई विशेषज्ञ मानवशक्ति
मुख्यमंत्री ने कहा कि जुलाई 2024 में देश में तीन नए आपराधिक कानून लागू किए गए। ब्रिटिश काल के पुराने कानूनों के स्थान पर भारतीय भावना के अनुरूप बनाए गए इन कानूनों में सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य संकलन अनिवार्य किया गया है। इसके लिए प्रशिक्षित मानवशक्ति की आवश्यकता थी। प्रदेश में 500 फॉरेंसिक एविडेंस कलेक्ट करने वाले पुलिस अधिकारियों की आवश्यकता के सापेक्ष सरकार ने 600 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है। ये अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचकर वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

भू-माफिया से मुक्त कराई जमीन पर बनाया फॉरेंसिक संस्थान
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले जिस भूमि पर भू-माफिया का कब्जा था, उसे मुक्त कराकर वहां यह महत्वपूर्ण संस्थान स्थापित किया गया। आज यह संस्थान प्रदेश में वैज्ञानिक जांच और न्याय व्यवस्था को मजबूत करने का केंद्र बन चुका है। यहां फॉरेंसिक साइंस के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसी आधुनिक विधाओं के प्रशिक्षण की व्यवस्था विकसित की गई है। संस्थान में डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी संचालित हो रहे हैं। क्वांटम फॉरेंसिक जैसे नए क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित करना भी समय की आवश्यकता है।

हर जिले में दो-दो फॉरेंसिक मोबाइल वैन, प्रयोगशालाओं का विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में वैज्ञानिक जांच की क्षमता बढ़ाने के लिए नई विधि विज्ञान प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं। प्रत्येक जिले में दो-दो फॉरेंसिक मोबाइल वैन उपलब्ध कराई गई हैं। पर्याप्त मानव संसाधन और आधुनिक तकनीक के माध्यम से घटनास्थल पर समय से पहुंचकर साक्ष्य जुटाने की व्यवस्था मजबूत की जा रही है। उन्होंने नवनियुक्त वैज्ञानिक अधिकारियों से कहा कि सरकार जिस उद्देश्य से यह आधारभूत ढांचा तैयार कर रही है, उसकी सफलता उनकी ईमानदारी और कार्यकुशलता पर निर्भर करेगी। उनका दायित्व है कि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज भी शासन तक पहुंचे और उसे न्याय मिले।

साढ़े नौ वर्षों में 9.5 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि दीपावली से ठीक पहले नियुक्ति पत्र प्राप्त करना सभी चयनित अभ्यर्थियों और उनके परिवारों के लिए खुशी का अवसर है। प्रदेश सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में 9.5 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई है। अगले छह माह में भी एक लाख नियुक्ति पत्र वितरित करने का लक्ष्य घोषित किया था। यह नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम उस निरंतर प्रक्रिया की एक कड़ी है। यह छठा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम है और अगले दिन उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए एक और बड़ा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित होगा।

इस अवसर पर वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश राजीव कृष्ण और अपर पुलिस महानिदेशक तकनीकी सेवाएं भगवान स्वरूप उपस्थित रहे।

You may be interested

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!