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सुरेन्द्र अग्निहोत्री

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए :-

राज्य पशुधन मिशन को मंजूरी

     मंत्रिपरिषद ने राज्य पशुधन मिशन को मंजूरी प्रदान की है। यह मिशन 05 उप-मिशनों में विभाजित है। इसमें पशुधन, उद्यमिता एवं स्टार्ट-अप विकास उप-मिशन; पशुधन एवं पोल्ट्री नस्ल विकास उप-मिशन; पशुपालन क्षेत्र में नवाचार, डिजिटल लाइव स्टाक, उद्यम आधुनिकीकरण, ए0आई0 अनुप्रयोग, जलवायु सहनशील तकनीक को बढ़ावा देने हेतु उप-मिशन; चारा एवं आहार उप-मिशन तथा अनुसंधान, वैश्वीकरण एवं ज्ञान प्रणाली विकास उप-मिशन सम्मिलित हैं।
राज्य पशुधन मिशन में सब्सिडी का ढांचा और मूल मार्गदर्शक सिद्धान्त प्रमुखतः राष्ट्रीय पशुधन मिशन के समान होंगे। प्रत्येक उप-मिशन के लिए गतिविधियाँ, सहायता पैटर्न और कार्यान्वयन एजेंसियां निर्धारित की जाएंगी। इससे मिशन के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए समन्वित दृष्टिकोण सुनिश्चित होगा।
ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश भारत में सर्वाधिक पशुधन वाला राज्य है। प्रदेश दुग्ध उत्पादन में प्रथम होने के साथ ही पशुधन उत्पादों, अण्डा, ऊन तथा मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में भी अग्रणी स्थान रखता है। इसके बावजूद इस क्षेत्र में कई समस्याएँ जैसे कम उत्पादकता, बिखरी हुई बाजार व्यवस्था, मूल्य संवर्धन की कमी, ट्रेसेबिलिटी (ट्रैकिंग) की कमी, कमजोर डिजिटल प्रबन्धन आदि बनी हुई हैं। राज्य की पशुधन अर्थव्यवस्था अभी भी असंगठित है एवं वैश्विक व्यापार एवं आधुनिक तकनीक से जुड़ाव सीमित है। इन समस्याओं को दूर करने हेतु प्रदेश सरकार ने राज्य पशुधन मिशन प्रारम्भ किया है।
यह मिशन विशेषकर लघु एवं सीमांत कृषकों तथा उद्यमियों को लक्षित करेगा, जो वर्तमान योजनाओं से आच्छादित नहीं हो सके हैं। इसका प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार सृजन (बकरी, भेड़, डेयरी, सूकर, कुक्कुट आदि), लाइवस्टॉक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना, चारा एवं पशु आहार उत्पादन क्षेत्र में उद्यमिता विकास, पशु उत्पादकता एवं उत्पादन में वृद्धि एवं मूल्य संवर्धन, पशु उत्पादों की वैश्विक बाजार तक पहुँच बढ़ाना, उत्पादक संगठनों को मजबूत करना, सप्लाई चेन को व्यवस्थित करना, जोखिम प्रबन्धन योजनाओं का आच्छादन बढ़ाना, प्रशिक्षण द्वारा कौशल विकास, डिजिटल ट्रेसेबिलिटी एवं ए0आई0 तकनीक का उपयोग विभिन्न जनपदों में जलवायु अनुकूल पशुधन उत्पाद का प्रोत्साहन किया जाना है।
राज्य पशुधन मिशन के अन्तर्गत आवंटित बजट को पशुपालन विभाग, उत्तर प्रदेश के निदेशालय स्तर पर राज्य पशुधन मिशन/एस0पी0एम0यू0 कार्यालय के निवर्तन पर रखा जाएगा। निर्धारित माइलस्टोन की प्राप्ति के अनुसार, स्क्रीनिंग समिति द्वारा अग्रेषित किए जाने तथा पी0ए0सी0 द्वारा सब्सिडी राशि की विधिवत स्वीकृति के बाद, केवल स्वीकृत परियोजनाओं के लिए ही सब्सिडी सीधे राज्य पशुधन मिशन/एस0पी0एम0यू0 कार्यालय से लाभार्थी के खाते में स्थानांतरित की जाएगी।
यह योजना राज्य वित्तपोषित है। केन्द्र-राज्य समन्वित योजनाओं (जहां ओवर लैपिग अनुमन्य है) की स्थिति में अवसंरचना/परिसम्पत्ति निर्माण एवं सेवा प्रदान करने के क्षेत्र में पी0पी0पी0 मॉडल को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।  

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अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों/वित्त विहीन माध्यमिक विद्यालयों/अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों/संस्कृत महाविद्यालयों एवं वित्त विहीन संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों एवं उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ

     मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों/वित्त विहीन माध्यमिक विद्यालयों/अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों/ संस्कृत महाविद्यालयों एवं वित्त विहीन संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों एवं उनके आश्रितों को स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के दृष्टिगत सरकारी चिकित्सालयों के साथ ही निजी चिकित्सालयों में भी अन्तः रोगी विभाग (आई0पी0डी0) में उपचार हेतु कैशलेस सुविधा प्रदान करने के प्रस्ताव को स्वीकृत किया है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों एवं उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस सुविधा अनुमन्य कराये जाने में, प्रति कर्मचारी अनुमानित 3,000 रुपये प्रीमियम की दर से, अनुमानित 48,062 कर्मचारियों हेतु कुल
14 करोड़ 41 लाख 86 हजार रुपये का वार्षिक वित्तीय व्यय भार अनुमानित है।

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बेसिक शिक्षा विभाग तथा समग्र शिक्षा परियोजना के शिक्षणेत्तर कार्मिकों एवं

उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ

     मंत्रिपरिषद ने बेसिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत बेसिक शिक्षा परिषद, अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल एवं वित्त विहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कार्मिकां, समग्र शिक्षा परियोजना के अन्तर्गत कार्यरत शिक्षणेत्तर कार्मिकों एवं उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ प्रदान करने का निर्णय लिया है।
बेसिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत कार्यरत शिक्षणेत्तर कार्मिकों एवं उनके आश्रित परिवार के सदस्यां को कैशलेस चिकित्सा सुविधा अनुमन्य कराये जाने में, प्रति कार्मिक अनुमानित 3,000 रुपये वार्षिक प्रीमियम की दर से, 1,22,304 अनुमानित कार्मिकों हेतु 36 करोड़ 69 लाख 12 हजार रुपये का वार्षिक व्ययभार अनुमानित है।
कैशलेस उपचार सुविधा योजना का क्रियान्वयन स्टेट एजेन्सी फॉर कॉम्प्रीहेन्सिव हेल्थ एण्ड इन्टीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) के माध्यम से कराया जाना प्रस्तावित है। यह सुविधा राजकीय चिकित्सालयों तथा साचीज के साथ सम्बद्ध निजी चिकित्सालयां में अनुमन्य होगी। इसकी दरें वही होंगी, जो प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभिकरण द्वारा समय-समय पर संसूचित की जाएगी।

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उ0प्र0 अन्तर्देशीय जलयान नियमावली, 2026 के प्रख्यापन का प्रस्ताव स्वीकृत

     मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश अन्तर्देशीय जलयान नियमावली, 2026 के प्रख्यापन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। प्रस्तावित नियमावली में भविष्य की आवश्यकता के दृष्टिगत किसी परिवर्तन हेतु मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
प्रदेश की समृद्ध नदियों (गंगा, यमुना, सरयू आदि) में सुरक्षित, विधिसम्मत और विनियमित जल परिवहन प्रणाली स्थापित करने के उद्देश्य से ’उत्तर प्रदेश अन्तर्देशीय जलयान नियम, 2002’ को अवक्रमित करते हुए भारत सरकार के अन्तर्देशीय जलयान अधिनियम, 2021 के अनुरूप उत्तर प्रदेश अन्तर्देशीय जलयान नियमावली, 2026 के प्रख्यापन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गयी है।
यह नियमावली सुरक्षा मानकों, पंजीकरण और सुदृढ़ प्रबन्धन के माध्यम से सुरक्षित जल परिवहन स्थापित करेगी। इससे दुर्घटनाओं पर रोक लगने के साथ-साथ नदी पर्यटन, पर्यावरण-अनुकूल माल परिवहन और स्थानीय लॉजिस्टिक्स को व्यापक बढ़ावा मिलेगा।
प्रस्तावित नियमावली में कुल 16 अध्याय शामिल हैं। इसमें अध्याय 1 से 14 तक यांत्रिक रूप से संचालित जलयानों (डमबींदपबंससल च्तवचमससमक टमेमसे), अध्याय 15 गैर-यांत्रिक जलयानों (छवद.डमबींदपबंससल च्तवचमससमक टमेमसे) और अध्याय 16 दोनों प्रकार के जलयानों के संचालन व विनियमन से सम्बन्धित विस्तृत नियमों से आच्छादित है।
इस नियमावली को भारत सरकार के अन्तर्देशीय जलयान अधिनियम-2021 की धारा-107 में दी गयी व्यवस्था के तहत अधिसूचना के नोटिफेशन से पूर्व प्रकाशन कराया जायेगा। नियमावली के प्रवृत्त (लागू) होने की तिथि से वर्तमान में विद्यमान सभी जलयानों को नए मानकों के अनुरूप परिवर्तित करने के लिए 90 दिन का समय प्रदान किया जाएगा।

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फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेस-वे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को जोड़ने हेतु लिंक एक्सप्रेस-वे, झाँसी लिंक एक्सप्रेस-वे तथा जेवर लिंक एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं के विकासकर्ताओं का चयन प्रस्ताव स्वीकृत

     मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेन्ट एण्ड कंस्ट्रक्शन (ई0पी0सी0) पद्धति पर विकसित की जा रही (1) फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेस-वे (पैकेज-प् एवं पैकेज-॥ ; लम्बाई 90.838 कि0मी0), (2) आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को जोड़े जाने हेतु लिंक एक्सप्रेस-वे (लम्बाई 50.940 कि0मी0) (3) झाँसी लिंक एक्सप्रेस-वे (पैकेज-प् एवं पैकेज-॥ ; लम्बाई 106.300 कि0मी0) एवं (4) जेवर लिंक एक्सप्रेस-वे (पैकेज-प्  एवं पैकेज-॥ ; लम्बाई 74.467 कि0मी0) परियोजनाओं के विकासकर्ताओं के चयन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
विकासकर्ता का चयन करने के पश्चात् लगभग 03 वर्ष की अवधि में विषयगत परियोजनाओं का विकास कार्य पूर्ण किए जाने तथा तत्पश्चात् 05 वर्षों तक अनुरक्षण कार्य हेतु राज्य सरकार का सम्भावित कुल व्यय-भार लगभग 17,542.06 करोड़ रुपये है। उक्त प्रस्ताव में केन्द्र सरकार द्वारा किसी प्रकार की भागीदारी अपेक्षित/प्रस्तावित नहीं है। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 760 लाख मानव दिवस के रोजगार का सृजन सम्भावित है।
प्रदेश में सुगम, तीव्र एवं सुरक्षित यातायात प्रदान करने हेतु यूपीडा द्वारा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवेज़ का विकास किया जा रहा है। वर्तमान में यूपीडा के 05 एक्सप्रेसवे संचालित हैं एवं 08 एक्सप्रेसवेज़ का विकास प्रस्तावित है। संचालित एक्सप्रेसवेज़ को आपस में कनेक्टिविटी प्रदान करने तथा प्रदेश के सर्वांगीण विकास हेतु विषयगत परियोजनाओं को ई0पी0सी0 पद्धति पर निर्मित किया जाना है।
इन परियोजनाओं के निर्माण से प्रदेश के पश्चिमांचल, मध्यांचल एवं पूर्वांचल क्षेत्रों को प्रदेश की राजधानी तथा राष्ट्रीय राजधानी से जोड़ने हेतु सुरक्षित एवं सुगम यातायात उपलब्ध हो जायेगा, जो प्रदेश के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में सहायक सिद्ध होगा।

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बुन्देलखण्ड क्षेत्र के जनपद झाँसी तथा ललितपुर में कुल 65,000 मीट्रिक टन

भण्डारण  क्षमता के भण्डार गृहां के निर्माण हेतु उ0प्र0 राज्य भण्डारण

निगम को निःशुल्क भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव स्वीकृत  

     मंत्रिपरिषद ने बुन्देलखण्ड क्षेत्र के जनपद झाँसी तथा ललितपुर में भण्डार गृह के निर्माण हेतु सहकारिता विभाग के अधीन स्थापित उत्तर प्रदेश राज्य भण्डारण निगम को निःशुल्क भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री जी द्वारा 19 मई, 2025 को सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में बुन्देलखण्ड क्षेत्र में गोदामों के निर्माण हेतु भूमि की उपलब्धता के लिए सम्बन्धित विभागों से समन्वय स्थापित कर तथा भण्डारण के प्रोत्साहन के लिए सार्थक पहल किये जाने के निर्देश दिये गये थे।
उक्त के क्रम में जनपद झाँसी तथा ललितपुर में दलहन, तिलहन, श्री अन्न (ज्वार, बाजरा) आदि के साथ-साथ कृषकों के उपजित सभी अनाजों के भण्डारण हेतु भण्डारण क्षमता के विस्तार के उद्देश्य से जनपद झाँसी में लगभग 30,000 मीट्रिक टन तथा जनपद ललितपुर में 35,000 मीट्रिक टन क्षमता (कुल 65,000 मीट्रिक टन क्षमता) के भण्डारगृहों का निर्माण किया जाना है।
भण्डार गृहों के निर्माण हेतु जनपद झाँसी में तहसील झाँसी के मौजा परवई में
4.2540 हेक्टेयर भूमि तथा जनपद ललितपुर की तहसील/परगना ललितपुर के ग्राम घटवार में 5.479 हेक्टेयर भूमि शासनादेश संख्या 32/744/एक-1-2016-20(5)/ 2016 दिनांक 03.06.2016 में निहित प्राविधानों से आवश्यक छूट प्रदान करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य भण्डारण निगम को निःशुल्क उपलब्ध करायी जाएगी।
भण्डारण सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को अपनी उपज के सुरक्षित एवं वैज्ञानिक भण्डारण की सुविधा प्राप्त होगी। कृषि उपज की गुणवत्ता एवं मूल्य संरक्षण में सहायता मिलेगी तथा कृषि विपणन व्यवस्था सुदृढ़ होने के साथ किसानों की आय में वृद्धि होगी।
बुन्देलखण्ड क्षेत्र में प्रायः सूखा, असमान वर्षा तथा कृषि उपज के विपणन से सम्बन्धित कठिनाइयाँ रहती हैं। ऐसे क्षेत्र में पर्याप्त भण्डारण अवसंरचना किसानों को बाजार की प्रतिकूल परिस्थितियों में अपनी उपज रोककर उचित समय पर विक्रय करने में सक्षम बनाएगी। इससे कृषि उपज की बर्बादी में कमी, आपूर्ति श्रृंखला में सुधार तथा क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा।
भण्डारगृहों के निर्माण से स्थानीय स्तर पर परिवहन, लोडिंग-अनलोडिंग, रख-रखाव एवं अन्य सहायक गतिविधियों के माध्यम से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष स्वरोजगार के अवसर सृजित होंगे।

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उ0प्र0 साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन सेन्टर की स्थापना का प्रस्ताव स्वीकृत

     मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश सरकार के डिजिटल आई0टी0 इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्टेट डाटा सेन्टर, यूपीस्वान, गवर्नमेन्ट एप्लीकेशनों एवं अन्य डिजिटल एसेट्स की साइबर सुरक्षा सुदृढ़ करने हेतु उत्तर प्रदेश साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन सेन्टर (न्च्.ब्ैव्ब्) की स्थापना के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
मंत्रिपरिषद द्वारा उत्तर प्रदेश साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन्स सेन्टर की स्थापना हेतु ब्3पभ्नइ, आई0आई0टी0 कानपुर को कार्यदायी संस्था के रूप में नामित किये जाने के प्रस्ताव को भी अनुमोदित किया गया है। ब्3पभ्नइ द्वारा न्च्.ब्ैव्ब् की स्थापना के साथ-साथ 03 वर्षां तक 24ग7 ऑपरेशन, मॉनिटरिंग, इंसीडेन्ट रिस्पॉन्स, रिपोर्टिंग, मेन्टेनेन्स एण्ड टेक्निकल सपोर्ट की सेवाएं प्रदान की जाएंगी।
उत्तर प्रदेश साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन्स सेन्टर की स्थापना तथा 03 वर्षां तक उसके ऑपरेशन एण्ड मेन्टेनेन्स के लिए 104.28 करोड़ रुपये की अनुमानित परियोजना लागत को भी मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित किया गया है। न्च्.ब्ैव्ब् की साइबर सिक्योरिटी व्यवस्था, सिक्योरिटी टूल्स एवं डिवाइसेज़ की परफॉर्मेस एवं अवेलिबिलिटी, ब्3पभ्नइ द्वारा निर्धारित सर्विस लेवल कमिटमेन्ट्स का अनुपालन तथा अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी एवं संचालन सम्बन्धी प्राविधानों की स्वतंत्र समीक्षा हेतु यूपीडेस्को द्वारा एक थर्ड-पार्टी सिक्योरिटी ऑडिटर को नियुक्ति किये जाने के प्रस्ताव को भी अनुमोदित किया गया है।
 उत्तर प्रदेश साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन्स सेन्टर के माध्यम से साइबर अटैक्स, डाटा ब्रीच, रेन्समवेयर तथा अन्य साइबर खतरों से होने वाले सम्भावित नुकसान को कम करने तथा सुरक्षित एवं निर्बाध डिजिटल गवर्नेन्स को बढ़ावा देने में सहायता मिलेगी। न्च्.ब्ैव्ब् के माध्यम से राज्य के महत्वपूर्ण डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं एप्लीकेशन्स की 24ग7 सेन्ट्रलाइज्ड साइबर सिक्योरिटी मॉनीटरिंग तथा इन्सीडेण्ट रिस्पॉन्स सुनिश्चित किया जाएगा।

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ग्रेटर नोएडा में प्रगति रोबोटिक्स पार्क की स्थापना का प्रस्ताव स्वीकृत

     मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश को आधुनिक तकनीक, उद्योग और नवाचार का प्रमुख केन्द्र बनाने की दिशा में ग्रेटर नोएडा में लगभग 69.52 एकड़ भूमि पर प्रगति रोबोटिक्स पार्क की स्थापना के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। ‘प्लेटफॉर्म फॉर रोबोटिक्स एण्ड ए0आई0 ग्रोथ थ्रू टेक्नोलॉजी एण्ड इनोवेशन’ (प्रगति) रोबोटिक्स पार्क का उद्देश्य रोबोट बनाने वाली कम्पनियों, तकनीकी स्टार्ट-अप, अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों को एक ही स्थान पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
पी0पी0पी0 मॉडल के माध्यम से प्रगति रोबोटिक्स पार्क की स्थापना की जाएगी। इसमें जोन-1 का कार्यान्वयन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण (26 प्रतिशत) तथा चयनित औद्योगिक साझीदार (74 प्रतिशत) की इक्विटी सहभागिता वाले एस0पी0वी0 के माध्यम से किया जाएगा। जोन-1 हेतु 08 एकड़ भूमि एस0पी0वी0 को 99 वर्ष के पट्टे पर 01 रुपये प्रति एकड़ की दर से उपलब्ध करायी जाएगी। अवशेष 61.52 एकड़ भूमि जोन-2 हेतु आरक्षित रखी जाएगी।
औद्योगिक साझीदार के गुणवत्ता-आधारित चयन (क्यू0बी0एस0) के उपरान्त एस0पी0वी0 का पंजीकरण, भूमि आवंटन, पट्टा विलेख निष्पादन एवं निर्माण कार्य सम्पन्न किया जाएगा। एस0पी0वी0 के पंजीकरण से 36 महीनों (अधिकतम 48 महीने) के भीतर जोन-1 का वाणिज्यिक संचालन प्रारम्भ किया जाएगा, जिसकी समीक्षा निगरानी समिति द्वारा की जाएगी।
परियोजना से स्वदेशी रोबोटिक्स विनिर्माण, वैश्विक मानकों के अनुरूप परीक्षण एवं प्रमाणन (सी0ई0/यू0एल0) की क्षमताएं सुदृढ़ होंगी तथा निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और परियोजना के पूर्ण संचालन पर राज्य की अर्थव्यवस्था में लगभग 2,000 करोड़ रुपये का वार्षिक सकल मूल्यवर्धन (जी0वी0ए0) सम्भावित है।
प्रदेश के युवाओं एवं कुशल तकनीकी कार्यबल के लिए उच्च मूल्य वाले रोजगार और वैश्विक स्तर के कौशल विकास के अवसर उपलब्ध होंगे। उद्यमियों एवं स्टार्ट-अप्स को किफायती दरों पर अत्याधुनिक परीक्षण, प्रोटोटाइपिंग तथा कम्प्यूट (जी0पी0यू0) सुविधाएं प्राप्त होंगी।
जोन-1 के अन्तर्गत रोबोटिक्स परीक्षण एवं प्रमाणन केन्द्र, रैपिड प्रोटोटाइपिंग, ए0आई0 कम्प्यूट अवसंरचना, मोशन कैप्चर एवं डेटा प्रयोगशालाओं जैसी साझा सुविधाओं को एक ही एकीकृत परिसर (सिंगल साइट) में उपलब्ध कराया जाना एक विशिष्ट नवाचार है।
प्रगति रोबोटिक्स पार्क तथा उससे जुड़े उद्योगों एवं मूल्य श्रृंखला (वैल्यु चेन) के माध्यम से पूर्ण विस्तार होने पर लगभग 1,00,000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है।

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मा0 उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के क्लास-1 एवं 2 श्रेणी के अधिकारीगण हेतु

देवघाट झलवा, प्रयागराज में टाइप-3 एवं टाइप-4 श्रेणी के कुल 845 आवासों

के निर्माण कार्य हेतु 54340.75 लाख रु0 की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति

     मंत्रिपरिषद ने मा0 उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के क्लास-1 एवं 2 श्रेणी के अधिकारीगण हेतु देवघाट झलवा, प्रयागराज में टाइप-3 (533 नग) एवं टाइप-4 (312 नग) श्रेणी के कुल 845 आवासों के निर्माण कार्य हेतु 54340.75 लाख रुपये (543 करोड़ 40 लाख 75 हजार रुपये मात्र) की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान करते हुए इसके सापेक्ष 5,000 लाख रुपये (पचास करोड़ रुपये मात्र) अवमुक्त किये जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है।
ज्ञातव्य है कि मा0 उच्च न्यायालय, इलाहाबाद प्रयागराज में तैनाती हेतु क्लास-1 एवं क्लास-2 श्रेणी के अधिकारियों हेतु कुल 2,607 पद स्वीकृत हैं। जिसके सापेक्ष कुल 1,866 अधिकारीगण कार्यरत हैं। क्लास-1 एवं क्लास-2 श्रेणी के अधिकारीगण हेतु केवल 128 फ्लैट/आवास उपलब्ध हैं। मा0 उच्च न्यायालय में कार्यरत 1,000 से अधिक अधिकारीगण द्वारा सरकारी आवास उपलब्ध कराये जाने की अपेक्षा की गयी है।

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 एफ0डी0आई0, एफ0सी0आई0, फॉर्च्यून ग्लोबल 500 एवं फार्च्यून इण्डिया 500 निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 के अन्तर्गत हायर अप्लायंसेज इण्डिया प्रा0लि0 तथा एकावो हॉस्पिटैलिटी प्रा0लि0 को लेटर ऑफ कम्फर्ट निर्गत करने का प्रस्ताव स्वीकृत

     मंत्रिपरिषद ने फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट (एफ0डी0आई0), विदेशी पूंजी निवेश (एफ0सी0आई0), फॉर्च्यून ग्लोबल 500 एवं फार्च्यून इण्डिया 500 निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 के अन्तर्गत इम्पावर्ड कमेटी की संस्तुति/निर्णय पर हायर अप्लायंसेज इण्डिया प्रा0लि0 तथा एकावो हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड को लेटर ऑफ कम्फर्ट (एल0ओ0सी0) निर्गत करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
ज्ञातव्य है कि हायर अप्लायंसेज़ इण्डिया प्राइवेट लिमिटेड, फार्च्यून इण्डिया 500 श्रेणी की कम्पनी है। हायर अप्लायंसेज़ द्वारा ग्रेटर नोएडा में एक अत्याधुनिक विनिर्माण संयंत्र स्थापित किया गया, जिसने दिसम्बर, 2021 से उत्पादन प्रारम्भ किया। वर्तमान में यह इकाई प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 4,253 व्यक्तियों को रोजगार प्रदान कर रही है। कम्पनी का प्रस्तावित निवेश 1,271 करोड़ रुपये है। परियोजना का क्रियान्वयन कम्पनी की वर्तमान औद्योगिक इकाई, प्लॉट संख्या एच-6, डी0एम0आई0सी0 इन्टीग्रेटेड इण्डस्ट्रियल टाउनशिप, ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित है।
एकावो हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड, एफ0डी0आई0/एफ0सी0आई0 श्रेणी की कम्पनी है। इसका प्रस्तावित निवेश 654.61 करोड़ रुपये है। कम्पनी द्वारा प्रयागराज में एक ग्रीनफील्ड लक्ज़री होटल परियोजना स्थापित किए जाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है, जिसमें लगभग 158 कक्ष एवं सुइट्स, बैंक्वेट सुविधाएं, रेस्तरां एवं एकीकृत वाणिज्यिक परिसर विकसित किए जाने का प्राविधान है।
हायर अप्लायंसेज़ इण्डिया प्राइवेट लिमिटेड तथा एकावो हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से कुल 1925.61 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।

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 उ0प्र0 वैश्विक क्षमता केन्द्र (जी0सी0सी0) नीति-2024 के अन्तर्गत 04 जी0सी0सी0 औद्योगिक इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट निर्गत करने का प्रस्ताव अनुमोदित

     मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश वैश्विक क्षमता केन्द्र (जी0सी0सी0) नीति-2024 के अन्तर्गत मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्च-स्तरीय प्राधिकृत समिति की संस्तुतियों के क्रम में 04 जी0सी0सी0 औद्योगिक इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट निर्गत किये जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित किया है।
इन जी0सी0सी0 औद्योगिक इकाइयां में मेसर्स हैवेल्स इण्डिया लिमिटेड (प्रस्तावित निवेश 879 करोड़ रुपये), मेसर्स अमेरिप्राइज इण्डिया एल0एल0पी0 (प्रस्तावित निवेश 112.84 करोड़ रुपये), मेसर्स मैटलाइफ ग्लोबल ऑपरेशन्स सपोर्ट सेण्टर प्रा0 लि0 (प्रस्तावित निवेश 84 करोड़ रुपये) तथा मेसर्स एल0जी0 सॉफ्ट इण्डिया प्रा0 लि0 (प्रस्तावित निवेश 634 करोड़ रुपये) की इकाइयां सम्मिलित हैं। उक्त 04 जी0सी0सी0 इकाइयों के माध्यम से कुल 1709.84 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।
मेसर्स हैवेल्स इण्डिया लिमिटेड तथा मेसर्स एल0जी0 सॉफ्ट इण्डिया प्रा0 लि0 को केस-टू-केस तथा मेसर्स अमेरिप्राइज इण्डिया एल0एल0पी0 तथा मेसर्स मैटलाइफ ग्लोबल ऑपरेशन्स सपोर्ट सेण्टर प्रा0 लि0 को नीति के अनुसार प्रोत्साहन दिया जाएगा।  
उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने के दृष्टिगत शासन द्वारा 07 मई, 2025 को उत्तर प्रदेश जी0सी0सी0 नीति, 2024 अधिसूचित की गई। इस नीति के क्रियान्वयन हेतु 07 जनवरी, 2026 को नियमावली निर्गत की गई है।
जनपद गौतमबुद्ध नगर में प्रस्तावित यह इकाइयां एडवांस्ड जी0सी0सी0 श्रेणी के अन्तर्गत हैं।  

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 सैनिक स्कूल, मैनपुरी के विविध निर्माण कार्यां हेतु ग्राम सभा नौनेर की

9.524 हे0 भूमि सैनिक स्कूल सोसाइटी/सैनिक स्कूल, मैनपुरी

के पक्ष में निःशुल्क हस्तान्तरित करने का प्रस्ताव अनुमोदित

     मंत्रिपरिषद ने सैनिक स्कूल, मैनपुरी के विविध निर्माण कार्यां हेतु ग्राम सभा नौनेर, तहसील व जनपद मैनपुरी की 9.524 हेक्टेयर भूमि को निःशुल्क पुनर्ग्रहण के माध्यम से माध्यमिक शिक्षा विभाग, उ0प्र0 शासन के निवर्तन पर रखे जाने एवं तत्पश्चात उक्त भूमि माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा सैनिक स्कूल सोसाइटी, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार/सैनिक स्कूल, मैनपुरी के पक्ष में निःशुल्क हस्तान्तरित किये जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है। मंत्रिपरिषद ने यह भी निर्णय लिया है कि प्रकरण में निहित शर्तां/व्यवस्था में भविष्य में किसी भी प्रकार का परिवर्तन मुख्यमंत्री जी की सहमति/अनुमोदन से किया जा सकेगा।
ज्ञातव्य है कि सैनिक स्कूल, मैनपुरी के परिसर में पूर्व से उपलब्ध भूमि के मध्य से 02 हाईटेंशन इलेक्ट्रिक लाइंस के गुजरने के कारण, भूमि का एक महत्वपूर्ण भाग निर्माण कार्य हेतु अनुपयुक्त हो जाने से अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता है। इसी क्रम में ग्राम सभा के प्रबन्धन में निहित उक्त भूमि सैनिक स्कूल सोसाइटी, रक्षा मंत्रालय, सैनिक स्कूल, मैनपुरी के पक्ष में निःशुल्क हस्तान्तरित करने का निर्णय लिया गया है। इस कार्यवाही से अतिरिक्त भूमि उपलब्ध हो जाने से  सैनिक स्कूल के कैडेटों, शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के उपयोग हेतु विभिन्न अवस्थापना सुविधाओं का निर्माण होगा तथा शिक्षण/शिक्षणेत्तर कार्य सुगम होंगे।  

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लखनऊ-हरदोई में 01 हजार एकड़ भूमि पर विकसित किए जा रहे पी0एम0 मित्र मेगा एकीकृत वस्त्र क्षेत्र एवं परिधान पार्क हेतु मास्टर डेवलपर के चयन हेतु एकल

बिड की स्वीकृति तथा प्रिफर्ड बिडर के चयन का प्रस्ताव अनुमोदित

     मंत्रिपरिषद ने पी0एम0 मित्र योजना के अन्तर्गत लखनऊ-हरदोई में 01 हजार एकड़ (404.69 हेक्टेयर) भूमि पर विकसित किए जा रहे पी0एम0 मित्र मेगा एकीकृत वस्त्र क्षेत्र एवं परिधान पार्क हेतु मास्टर डेवलपर के चयन हेतु प्राप्त एकल बिड की स्वीकृति तथा मेसर्स रामकी इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को प्रिफर्ड बिडर के रूप में चयनित किए जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित किया है।
पी0एम0 मित्र पार्क लखनऊ का विकास एवं संचालन भारत सरकार तथा उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त स्वामित्व वाले स्पेशल परपज़ व्हेकिल-पी0एम0 मित्र पार्क उत्तर प्रदेश लिमिटेड के माध्यम से किया जा रहा है। इसमें प्रदेश सरकार की 51 प्रतिशत तथा भारत सरकार की 49 प्रतिशत अंशधारिता है।
परियोजना की स्थापना हेतु लखनऊ-हरदोई क्षेत्र में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग द्वारा पी0एम0 मित्र पार्क उत्तर प्रदेश लिमिटेड को 01 हजार एकड़ भूमि 01 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से 99 वर्ष की लीज़ पर उपलब्ध करायी गयी है। राज्य सरकार द्वारा परियोजना के लिए आवश्यक वाह्य अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध करायी जानी हैं। इसके अन्तर्गत पार्क तक 06 लेन सड़क सम्पर्क, विद्युत आपूर्ति तथा जलापूर्ति से सम्बन्धित कार्य कराए जा रहे हैं। पी0एम0 मित्र पार्क की स्थापना से लगभग 01 लाख रोजगार का सृजन होगा। आसपास के सम्पूर्ण क्षेत्र के औद्योगिक विकास के साथ-साथ निवेश और व्यापार का वातावरण भी सृजित होगा।
परियोजना का विकास डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट एण्ड ट्रांसफर (डी0बी0एफ0ओ0टी0) आधारित पी0पी0पी0 मॉडल पर चयनित मास्टर डेवलपर/कन्सेशनेयर एस0पी0वी0 द्वारा किया जाएगा। कन्सेशन पीरियड, 05 वर्ष की निर्माण अवधि सहित, अप्वाइंटेड डेट से 50 वर्ष निर्धारित है। परियोजना की अनुमानित लागत 1,947 करोड़ रुपये है। इसके सापेक्ष भारत सरकार द्वारा योजना के अन्तर्गत एलिजिबल प्रोजेक्ट कॉस्ट का 30 प्रतिशत, अधिकतम 500 करोड़ रुपये तक, ग्राण्ट के रूप में उपलब्ध कराया जाना प्रस्तावित है।
परियोजना में अधिकतम प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने हेतु निविदा का व्यापक प्रचार-प्रसार कराया गया। निविदा सूचना का प्रकाशन 02 चरणों में दिनांक 27.06.2026 एवं 03.07.2026 को 06 राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दैनिक समाचार-पत्रों (दि इकोनॉमिक टाइम्स, द टाइम्स ऑफ इण्डिया, हिन्दुस्तान टाइम्स, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर एवं नवभारत टाइम्स) के अहमदाबाद, बेंग्लुरु, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, मुम्बई एवं लखनऊ, कुल 08 शहरों के संस्करणों में कराया गया।
इसके अतिरिक्त, ई-टेण्डर पोर्टल, नेशनल इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेण्ट कॉर्पोरेशन, इन्वेस्ट यू0पी0 तथा हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग की वेबसाइटों तथा सोशल मीडिया के माध्यम से भी निविदा का प्रचार-प्रसार किया गया। तकनीकी एवं वित्तीय निविदा में मेसर्स रामकी इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को पी0एम0 मित्र पार्क, लखनऊ हेतु प्रिफर्ड बिडर (मास्टर डेवलपर) के रूप में अर्ह पाया गया।
चयनित मास्टर डेवलपर को पार्क के भीतर आंतरिक सड़क, विद्युत वितरण, बुनियादी ढांचा, जल और अपशिष्ट जल शोधन सुविधाएं, प्लग एवं प्ले बुनियादी ढांचे का विकास, फैक्ट्री शेड्स, इन्क्यूबेशन सेण्टर, सपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे सामान्य प्रसंस्करण सुविधा (सी0ई0टी0पी0 विद जेड0एल0डी0) कॉमन बॉयलर, श्रमिकों के लिए हॉस्टल और आवास (विशेष रूप से महिला श्रमिकों के लिए), स्वास्थ्य सुविधाएं, प्रशिक्षण और कौशल विकास, लॉजिस्टिक्स तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास करना होगा।

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प्रयागराज में ऑडिटोरियम व वर्किंग विमेन हॉस्टल के निर्माण हेतु 7,912 वर्गमीटर

नजूल भूमि नगर विकास विभाग (नगर निगम, प्रयागराज) के पक्ष में

निःशुल्क आवंटित/हस्तांतरित करने का निर्णय

     मंत्रिपरिषद ने जिलाधिकारी, प्रयागराज से प्राप्त प्रस्ताव/संस्तुति के क्रम में वित्त (लेखा) अनुभाग-2 के कार्यालय ज्ञाप संख्या-ए-2-75/दस-77-14(4)/74 दिनांक 03.02.1977 के प्राविधानों को शिथिल करते हुए अपवादस्वरूप उक्त कार्यालय ज्ञाप के अधीन नजूल भूखण्ड संख्या-113 सिविल स्टेशन (किताब घर), प्रयागराज क्षेत्रफल 7912 वर्गमीटर भूमि को ऑडिटोरियम व वर्किंग विमेन हॉस्टल के निर्माण हेतु नगर विकास विभाग (नगर निगम, प्रयागराज) के पक्ष में कतिपय शर्तों एवं प्रतिबन्धों के अधीन प्रभावी जिलाधिकारी सर्किल दर पर छूट प्रदान करते हुए निःशुल्क आवंटित/हस्तांतरित करने का निर्णय लिया है।

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अमृत-2.0 योजना के अन्तर्गत नगर निगम, वाराणसी एवं नगर निगम, लखनऊ

की सीवरेज तथा पेयजल सम्बन्धी 07 परियोजनाओं का व्यय प्रस्ताव अनुमोदित

     मंत्रिपरिषद ने अटल नवीकरण और शहरी रूपान्तरण मिशन-2.0 (अमृत-2.0) योजना के अन्तर्गत नगर निगम, वाराणसी एवं नगर निगम, लखनऊ में सीवरेज तथा पेयजल से सम्बन्धित कुल 07 परियोजनाओं के व्यय प्रस्ताव को अनुमोदित किया है।
योजना के फण्डिंग पैटर्न के अनुसार 07 परियोजनाओं का केन्द्रांश 69641.71 लाख रुपये, राज्यांश 186639.87 लाख रुपये, निकायांश 22285.37 लाख रुपये एवं सेंटेज 11394.58 लाख रुपये का वहन किया जाना है।  
इन परियोजनाओं में से 06 परियोजनाएं नगर निगम वाराणसी से सम्बन्धित हैं। इनमें सीवरेज सम्बन्धी 03 तथा पेयजल सम्बन्धी 03 परियोजनाएं शामिल हैं। परियोजनाओं के क्रियान्वयन से नगर निगम वाराणसी की लगभग 8.52 लाख की आबादी सीवरेज एवं लगभग 8.22 लाख की जनसंख्या पेयजल व्यवस्था लाभान्वित होगी। लखनऊ नगर निगम की 01 पेयजल परियोजना से लगभग 1.56 लाख आबादी लाभान्वित होगी।

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