भारत में बरसात के मौसम में भुने चने खाने का रिवाज भी सालों पुराना है। देश के अलग-अलग हिस्सों में चने के सैकड़ों पकवान आपको खाने को मिल जाएंगे। दिल्ली मुंबई जैसे बड़े शहरों में बारिश होते ही लोग सड़कों पर भुने हुए चने, या भेल- पुरी की तलाश में निकल पड़ते हैं। वहीँ छोटे शहरों में भी बरसात के मौसम में गली-गली में आपको एक व्यक्ति भुने हुए चनों का ठेला लगाए दिख जाएगा। कुछ लोग चनों को मकई के दानों के साथ खाना पसंद करते हैं, तो कुछ लोग इसे मुरमुरे और सेव के साथ मिलाकर खाते हैं। बुंदेलखंड में भी सावन का मौसम आते ही घर-घर में चने भूनने का काम शुरू हो जाता है और बच्चों से लेकर बड़ों तक, सभी बारिश का मज़ा चने की बहुरी के साथ उठाते हैं।
अगर हम पकवानों की बात करने बैठ गए, तो शायद सावन बीत जाएगा लेकिन हिंदुस्तानी व्यंजन नहीं ख़तम होंगे और यही तो हमारे देश की पहचान है, हर मोड़ पर एक नयी भाषा, एक नया अंदाज़ और हाँ ढेरों अलग-अलग तरह के खान-पान।भारत की इसी खूबसूरती का स्वाद चखने दुनिया भर से लोग आते हैं और अपने साथ ले जाते हैं यहाँ की परम्पराएं, हर मौसम को त्योहार की तरह मनाने का उल्लास, और भोजन के रूप में कुछ खट्टी-मीठी और चटपटी यादें। तो इस बरसात क्यों न आप भी अपनी सारी परेशानियों को दिमाग से निकालकर कुछ दिन सावन का लुत्फ़ उठाइये और इन सभी व्यंजनों का मज़ा अपने परिवार के साथ मिलकर उठाइये।

