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समीक्षक- सुरेन्द्र अग्निहोत्री

नितीन उपाध्ये का कथा संकलन “उलझी सुलझी कथाएं”में उलझी गुत्थियों को बड़े करीने से सुलझाया है। इसमें प्रकृति का समय-समय पर उलझनें पैदा करना और मानवीय संवेदना से उन्हें समाधान की ओर ले जाने का रोचक प्रयास है।पहली कहानी में जलेबियों में रामआसरे की जलेबियों का आर्कषण-पत्नी के लिए पूरी कचौरी-जलेबियां विशेष आदि के मजेदार घटनाक्रम का प्रस्तुतीकरण लेखक ने किया है। जीवनसंगिनी को बड़े सहज ढंग से प्यार के अदृश्य डोर से अपनी ओर खीचकर  सरलता से बांध देता है और मुग्ध कर देता है।  
“दाई मां” यह एक विशिष्ट कहानी है और पाठक को एक नये चिन्तन की ओर उन्मुख करती है। आज़ादी के लिये बलिदान देने वाले  लिये गुमनाम सैनिको को उचित सम्मान देकर नयी पीढ़ी को उनकी वीरता से और उनके बलिदान से अवगत कराने की सरकार द्वारा जब घोषणा हुई तो लेखक ने अपने ससुराल में  पिछले पचास साल से आने वाली दाई मां से पूछ ही लिया “आप कितने साल की थी जब देश आजाद हुआ था” ? तब फुलवा दाई मां के भीतर दर्द  का ज्वालामुखी फूट पड़ा और यही से कथा को लेखक नये मोड़ देता है। “फुलवा” “मंगू” ‘संजीव” और ‘रेवा का समूचा कथानक आपको लगातार विडम्बना तथा उलझन में लपेट लेता है। फुलवा का दाई का रूप पुरानी धाय मां कहानी की याद दिलाता है। प्रमुख पात्र फुलवा, मंगू , संजीव और रेवा का मोहक कथा जाल-आपको स्मृतियो के गलियारे में ले जायेगा-फुलवा का दाई के रूप लम्बी यातना और जीवन यात्रा वृत्त का विस्तार अत्यन्त महत्वपूर्ण तरीके से किया गया है।
अन्य कथायें जैसे चढ़ावा, मोटी सुई, इच्छा मृत्यु, चरित्र का प्रमाणपत्र, दशहरा मेला, गंगा-सागर, जयचंद आदि अनेकानेक लघु कथाओं में लघु कथाकार को कथा, पात्र, महत्वपूर्ण घटनाक्रम और उन सब को बड़ी रोचकता से प्रस्तुत करने की कला का कठिन निर्वहन करते हुए आगे की ओर बढ़ती है। कहानियाँ मन-मस्तिष्क को झिंझोड़ती ही नहीं, बल्कि मस्तिष्क में अपने लिए एक कोना स्वयं ही तलाश कर जगह बना लेती हैं। साथ ही पाठक को सोचने पर विवश कर देती हैं और एक सामाजिक संदेश उन कहानियों में होता है।  मस्तिष्क के प्रत्येक खांचे में नितीन उपाध्ये की एक-एक कहानी इस प्रकार समा जाती है, जैसा कि उस पात्र को अपने आस-पास या बिल्कुल करीब से देखा हो, यह उनकी कहानियों की सबसे बड़ी विशेषता है । अंत में इतना ही कहना चाहूँगा कहानी-संग्रह ’उलझी सुलझी कथाएं,’ पाठको कों एक बार अपनी ’सोच’ को सोचने को विवश जरूर करेगा ।

पुस्तक-उलझी सुलझी कथाएं,
लेखक- नितीन उपाध्ये
 प्रकाशक- शतरंग प्रकाशन, एस-43 विकास दीप,स्टेशन रोड, लखनऊ-226001

Email:Ltp284403@gmail.com
   मूल्यः 350/-

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