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डॉ. रामबाबू पाण्डेय

डॉ. उदित नारायण पाण्डेय द्वारा लिखित कहानी संग्रह “समझावनपुर” कहानी-संग्रह सड़क सुरक्षा जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण लेकिन अक्सर उपेक्षित विषय को साहित्यिक संवेदना के साथ प्रस्तुत करता है। यह संग्रह केवल नियमों या उपदेशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सड़क से जुड़ी मानवीय लापरवाहियों, सामाजिक मानसिकता और उनके गंभीर परिणामों को कहानियों के माध्यम से प्रभावी ढंग से सामने लाता है।
संग्रह की कहानियाँ आम जनजीवन से जुड़ी हैं, जहाँ जल्दबाजी, असावधानी, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी के कारण दुर्घटनाओं को जन्म देते हैं। कई प्रसंगों में यह स्थिति ‘माता शत्रुः पिता वैरी येन बालो न पाठितः’ जैसी लगती है, जहाँ अज्ञानवश किया गया प्रेम या ढील—जैसे बच्चों को बिना हेलमेट वाहन चलाने देना या गलत आदतों पर चुप्पी साध लेना—भविष्य में उनके लिए घातक सिद्ध होता है। इस प्रकार लेखक यह संकेत करता है कि असावधान संरक्षण भी कभी-कभी शत्रुता के समान परिणाम देता है।
लेखक ने दुर्घटनाओं और उनके दुष्परिणामों को भावनात्मक गहराई के साथ चित्रित किया है, जिससे पाठक केवल पढ़ता नहीं, बल्कि आत्ममंथन करने को विवश होता है। कई कहानियों में दार्शनिक न्याय का प्रयोग किया गया है। जैसे ‘काकतालीय न्याय’ यह एक भारतीय कहावत और दार्शनिक अवधारणा है जो संयोगवश हुई घटनाओं को दर्शाती है, जहाँ दो स्वतंत्र घटनाएं एक साथ घटित होती हैं और लोग गलती से उनमें कार्य-कारण संबंध जोड़ देते हैं, जबकि वास्तव में कोई संबंध नहीं होता।   जैसे गुप्ता जी बाबा जी के यहां जाते हैं और उन्हे संयोगवश नौकरी मिल जाती है। वास्तव में यह उनकी मेहनत और लगन का फल है।
“समझावनपुर” की भाषा सरल, सहज और संवादात्मक है, जिससे सड़क सुरक्षा का संदेश बोझिल नहीं लगता। पात्र ग्रामीण और कस्बाई परिवेश से आते हैं, जो यह स्पष्ट करते हैं कि सड़क दुर्घटनाएँ केवल शहरों की समस्या नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग से जुड़ा प्रश्न हैं। करुणा के माध्यम से यह दिखाया गया है कि एक छोटी-सी लापरवाही किस प्रकार पूरे परिवार को जीवन भर का दंश दे सकती है।
इस संग्रह की विशेषता यह है कि यह डर या प्रचार के सहारे नहीं, बल्कि संवेदना, अनुभव और सामाजिक प्रतीकों के माध्यम से सड़क सुरक्षा का महत्व स्थापित करता है। यद्यपि कुछ कहानियों में संदेश की प्रधानता अधिक दिखाई देती है, फिर भी उनका सामाजिक उद्देश्य उन्हें प्रभावशाली बनाता है।
   “समझावनपुर” सड़क सुरक्षा पर आधारित एक सार्थक और जागरूकता फैलाने वाला कहानी-संग्रह है, जो पाठकों को जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देता है तथा साहित्य को उसके सामाजिक दायित्व से सशक्त रूप में जोड़ता है।

पुस्तक: समझावनपुर;(कहानी संग्रह )
लेखक:डॉ. उदित नारायण पाण्डेय
प्रकाशन: शतरंग प्रकाशन
एस-43, विकास दीप बिल्डिंग,
दूसरी मंजिल, स्टेशन रोड, लखनऊ-226001
ईमेल:Ltp284403@gmail.com
मूल्य:400
https://www.amazon.in/gp/product/819927252X/ref=cx_skuctr_share_ls_srb?smid=AEKR5U
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