सुरेंद्र अग्निहोत्री
लखनऊ: 26 अक्टूबर, 2026
महर्षि वाल्मीकि जयंती के पावन अवसर पर राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश द्वारा संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय लाइव चित्रकला शिविर के प्रथम दिवस का आयोजन आज अकादमी परिसर, लाल बारादरी भवन, कैसरबाग, लखनऊ में किया गया। शिविर में आमंत्रित कलाकारों ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन, उनके महान साहित्यिक योगदान तथा रामायण के विविध प्रसंगों को अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से कैनवास पर साकार किया।
माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में भारतीय
संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं, महापुरुषों के जीवन-दर्शन तथा सामाजिक समरसता के मूल्यों को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। महर्षि वाल्मीकि का जीवन और कृतित्व समाज को समता, करुणा, नैतिकता एवं मानवीय संवेदनाओं का संदेश देता है। इसी भावना के अनुरूप आयोजित यह शिविर कला के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि के विचारों एवं भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जनमानस तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
माननीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री जयवीर सिंह जी की प्रेरणा से प्रदेश में कला एवं संस्कृति की विभिन्न विधाओं के संरक्षण, संवर्धन तथा कलाकारों को रचनात्मक अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। महापुरुषों की जयंती एवं महत्वपूर्ण सांस्कृतिक अवसरों पर कला गतिविधियों का आयोजन भारतीय परंपराओं को सृजनात्मक अभिव्यक्ति प्रदान करने तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का माध्यम है।
अपर मुख्य सचिव, संस्कृति एवं पर्यटन, श्री अमृत अभिजात जी के निर्देशन में आयोजित इस शिविर का उद्देश्य कलाकारों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक आख्यानों को समकालीन चित्रकला के माध्यम से प्रस्तुत करना है। अकादमी के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा एवं उपाध्यक्ष श्री गिरीश चन्द्र मिश्रा द्वारा तैयार रूपरेखा के अनुरूप शिविर में दस कलाकारों को आमंत्रित किया गया है।
प्रथम दिवस पर रामायण के विविध प्रसंगों का चित्रांकन
शिविर में प्रतिभाग कर रहे कलाकारों को अकादमी की ओर से 2.5 × 3 फीट आकार के कैनवास एवं एक्रिलिक रंग उपलब्ध कराए गए हैं। कलाकारों ने रामायण के विविध प्रसंगों, महर्षि वाल्मीकि के जीवन तथा उनके साहित्यिक योगदान को चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त किया।
शिविर में सहभागी कलाकारों एवं उनकी कलाकृतियों का विवरण निम्नवत् है-
1. श्री विनीत पाण्डेय – रामायण में वर्णित कौंच पक्षी की घटना पर आधारित चित्र, जिसमें पक्षी के वध से उत्पन्न करुणा की अनुभूति को दर्शाया गया है।
2. श्री मोहन मावा – रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बनने की प्रेरक जीवन-यात्रा का चित्रांकन।
3. श्री मनोज कुमार गौंड – आदि कवि महर्षि वाल्मीकि द्वारा वन में बैठकर रामायण की रचना करते हुए चित्रण।
4. सुश्री मैनाज बानो – रामायण की रचना करते हुए महर्षि वाल्मीकि तथा राम, लक्ष्मण और सीता के प्रसंगों का चित्रांकन।
5. श्री अश्वनी कुमार प्रजापति – वन में कौंच पक्षी एवं अन्य जीव-जंतुओं के साथ महर्षि वाल्मीकि का चित्रण।
6. श्री फौजदार कुमार – रामायण की रचना करते हुए महर्षि वाल्मीकि तथा राम, लक्ष्मण और सीता के प्रसंगों का चित्रांकन।
7. श्री विनोद कुमार सिंह – महर्षि वाल्मीकि द्वारा रामायण की रचना के माध्यम से भगवान श्रीराम के दिव्य स्वरूप की भावाभिव्यक्ति।
8. सुश्री नेहा कुमारी – रामायण में वर्णित उत्तरकाण्ड, लव-कुश तथा रामायण की रचना से संबंधित प्रसंगों का चित्रांकन।
9. श्री मनोज कुमार हंसराज – महर्षि वाल्मीकि द्वारा रामायण की रचना से पूर्व स्फुरित प्रथम श्लोक की भावभूमि पर आधारित चित्र।
10. श्री सिद्धार्थ देव – वन में कौंच पक्षी एवं अन्य जीव-जंतुओं के साथ महर्षि वाल्मीकि का चित्रण।
इन कलाकृतियों के माध्यम से कलाकारों ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन के विभिन्न आयामों, उनकी संवेदनशीलता, सृजनशीलता तथा भारतीय साहित्य और संस्कृति में उनके अमूल्य योगदान को कलात्मक स्वरूप प्रदान किया।
इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में विशाल रंगोली का सृजन
महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर राज्य ललित कला अकादमी द्वारा इंजीनियरिंग कॉलेज, लखनऊ परिसर में महर्षि वाल्मीकि के जीवन एवं कृतित्व पर आधारित एक विशाल रंगोली का सृजन भी कराया गया। इस पहल का उद्देश्य कला के विविध माध्यमों से महर्षि वाल्मीकि के सांस्कृतिक योगदान एवं उनके प्रेरणादायी जीवन-दर्शन को अधिकाधिक लोगों तक पहुँचाना है।
27 अक्टूबर तक जारी रहेगा शिविर
दो दिवसीय लाइव चित्रकला शिविर का आयोजन 27 अक्टूबर, 2026 तक जारी रहेगा। दूसरे दिन भी कलाकार अपनी कलाकृतियों को अंतिम रूप देंगे। अकादमी द्वारा कलाकारों को आवश्यक कला सामग्री एवं अन्य व्यवस्थाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
राज्य ललित कला अकादमी का यह आयोजन भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, कला के संवर्धन तथा सामाजिक समरसता के मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। महर्षि वाल्मीकि के जीवन एवं कृतित्व से प्रेरणा ग्रहण करता यह शिविर कला, साहित्य और संस्कृति के अंतर्संबंधों को रेखांकित करता है तथा भारतीय परंपराओं को रचनात्मक माध्यम से अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है।

