समीक्षक-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
श्री विदर्भ कुमार जी एवं श्री सुरेन्द्र अग्निहोत्री जी के कुशल संपादन में ‘बुंदेली मधुकर’ का प्रवेशांक अक्टूबर -2026 को लखनऊ (उत्तरप्रदेश) से प्रकाशित होकर हस्तागत हुआ पढ़ कर अच्छा लगा कि इस पत्रिका में माध्यम से हमारी बुंदेली और अधिक समृद्ध होगी।
‘बुंदेली मधुकर’ के इस प्रवेशांक में 58 पृष्ठों पर 21 आलेख प्रकाशित किये गये है तथा विभिन्न विषयों पर अनेक बुंदेली कविताएं भी दी गयी है। स्थापित बुंदेली साहित्यकारों के साथ इसमें मेरे दोहों को भी स्थान दिया है जो कि मेरे लिए बहुत गौरव की बात है।
इस अंक में श्री महेन्द्र भीष्म जी और श्रीमती रानी कुकसाल की कहानियां अच्छी लगीं।
राघवेंद्र उदैनिया, सीताराम साहू,अरविन्द खरे नवज्योति,अमर सिंह राय, अरविन्द तिवारी, कमलेश सेन डां. सतीश बब्बा, रामानंद पाठक ‘नंद’,सुदेश सोनी, संतोष पटेरिया,प्रतीम, राजाराम आदि की कविताएं पठनीय हैं।
रितु दुवे सागर का #नौरता एवं देवेन्द्र गुरु का नौरता,सुआटा पर आलेख बढ़िया है।
बतकाव स्तंभ के डांस कामिनी जी एवं रवीन्द्र सत्यार्थी जी के आलेख पठनीय है। डॉ रविशंकर पांडेय, स्व. आयोध्या प्रसाद कुमुद जी राम मनोहर त्रिपाठी के आलेख नयी पीढ़ी के लिए बहुत उपयोगी है।
सतीश पुरोहित की ‘चितेरी’ और श्री सुधाकर उपाध्याय का आलेख ‘लल्तपुर कों देवगढ़’ अच्छे लगे।
श्री अग्निहोत्री जी देश के एक वरिष्ठ एवं श्रेष्ठ पत्रकार तो हैं ही एक अच्छे संपादक हैं बुंदेली मधुकर को प्रकाशित करके वे अपनी बुंदेलखंड जन्म भूमि ललितपुर का ऋण बुंदेली की सेवा करके उतार रहे हैं यह बहुत श्लाघनीय कार्य है।
आशा है पत्रिका शीघ्र ही अपना मुकाम हासिल कर लेगी। शुभकामनाएं सहित।

