-डॉ. जगदीष गाँधी, संस्थापक-प्रबन्धक
सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ
‘विश्व शांति के हम साधक हैं जंग न होने देंगे, युद्धविहीन विश्व का सपना भंग न होने देंगे। हम जंग न होने देंगे..।’ की महान विचारों के अनुरूप अपना सारा जीवन विश्व मानवताके कल्याण के लिए समर्पित करने वाले अत्यन्त ही सरल, विनोदप्रिय एवं मिलनसार व्यक्तित्व के धनी भारत रत्न माननीय श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी एक कुषल राजनीतिज्ञ होने केसाथ-साथ एक अच्छे वक्ता एवं कवि भी थे। अटल बिहारी वाजपेयी जी के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। हर कोई उन्हें उनके भाषणों, कविताओं आदि के जरिए याद कर रहा है। हमारामानना है कि भले ही आज अटल जी हम सबको छोड़कर चिरनिद्रा में लीन हो गए हों लेकिन उनकी वाणी, उनका जीवन दर्शन सभी भारतवासियों को हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। उनकाओजस्वी, तेजस्वी और यशस्वी व्यक्तित्व सदा देश के लोगों का मार्गदर्शन करता रहेगा।
अटल जी पूर्व प्रधानमंत्री माननीय श्री मोरारजी देसाई की सरकार में 1977 से 1979 तक विदेश मंत्री रहे। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में उन्होंने हिंदी में भाषण दिया। अटलजी ही पहले विदेश मंत्री थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी में भाषण देकर भारत को गौरवान्वित किया था। इस भाषण को इन्होंने कहा कि – ‘‘अध्यक्ष महोदय वसुधैव कुटुंबकम कीपरिकल्पना बहुत पुरानी है। भारत में सदा से हमारा इस धारणा में विश्वास रहा है कि सारा संसार एक परिवार है। … मैं भारत की ओर से इस महासभा को आश्वासन देना चाहता हूं कि हमएक विश्व के आदर्शों की प्राप्ति और मानव कल्याण तथा उसके गौरव के लिए त्याग और बलिदान की बेला में कभी पीछे नहीं रहेंगे। जय जगत धन्यवाद।’’ उनके इस भाषण में भी उनकेविश्व शांति का साधक होने का पता चलता हैं। संयुक्त राष्ट्र में अटल बिहारी वाजपेयी का हिंदी में दिया भाषण उस वक्त काफी लोकप्रिय हुआ था। यह पहला मौका था जब यूएन जैसे बड़ेअतंराष्ट्रीय मंच पर भारत की गूंज सुनने को मिली थी। अटल बिहारी वाजपेयी का यह भाषण यूएन में आए सभी प्रतिनिधियों को इतना पसंद आया कि उन्होंने खड़े होकर अटल जी के लिएतालियां बजाई थी।

