सुरेन्द्र अग्निहोत्री
लखनऊ: 22 अक्टूबर, 2026
उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें सम्मानजनक आजीविका से जोड़ने की दिशा में विद्युत सखी कार्यक्रम उल्लेखनीय सफलता हासिल कर रहा है। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं बिजली बिल संग्रह के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। यह कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण, आर्थिक स्वावलंबन और ग्रामीण विकास का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरा है।
उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आजीविका के नए अवसरों से जोड़ना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। विद्युत सखी कार्यक्रम के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं और समाज में उनके मान-सम्मान तथा प्रतिष्ठा में भी वृद्धि हो रही है। महिलाओं की मेहनत, लगन और उद्यमशीलता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी गति प्रदान कर रही है।
उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के बीच समन्वय से संचालित इस कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण उपभोक्ताओं को बिजली बिल जमा करने की सुविधाजनक सेवा उपलब्ध हो रही है। इससे बिजली बिल संग्रह व्यवस्था को मजबूती मिल रही है, वहीं ग्रामीण महिलाओं को अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में ही रोजगार एवं आय अर्जित करने का अवसर प्राप्त हो रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार विद्युत सखी कार्यक्रम की शुरुआत से अब तक प्रदेश की विद्युत सखियों ने 3,650 करोड़ रुपये से अधिक के बिजली बिल का संग्रह किया है। इसके माध्यम से उन्होंने 46.98 करोड़ रुपये से अधिक का कमीशन अर्जित किया है। वर्तमान में प्रदेश में 16,144 सक्रिय विद्युत सखियां क्षेत्र में कार्यरत हैं, जो ग्रामीण उपभोक्ताओं तक बिजली बिल भुगतान की सुविधा पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
कार्यक्रम के अंतर्गत महिलाओं ने अपनी कार्यक्षमता और प्रतिबद्धता से उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रदेश की 70 विद्युत सखियों ने एक-एक करोड़ रुपये से अधिक का बिजली बिल संग्रह कर विशेष उपलब्धि दर्ज की है। इन महिलाओं ने सामूहिक रूप से 70 करोड़ रुपये से अधिक का बिल संग्रह किया है। एकमुश्त समाधान (ओटीएस) योजना के अंतर्गत भी विद्युत सखियों का योगदान उल्लेखनीय रहा है। अमेठी की सोनी द्विवेदी ने 3.1 करोड़ रुपये, रामपुर की मेहर जहां ने 2.7 करोड़ रुपये तथा बाराबंकी की राजश्री शुक्ला ने 2.3 करोड़ रुपये का बिजली बिल संग्रह कर अपनी उत्कृष्ट कार्यक्षमता का परिचय दिया है।
जिलों में भी विद्युत सखी कार्यक्रम के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। सहारनपुर, सुल्तानपुर, मेरठ और अमेठी सहित विभिन्न जिलों में विद्युत सखियों ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए बिजली बिल संग्रह अभियान को गति दी है। उनकी सक्रियता से ग्रामीण उपभोक्ताओं को स्थानीय स्तर पर सुविधा मिल रही है और महिलाओं की नियमित आय के अवसरों में विस्तार हो रहा है।
विद्युत सखी कार्यक्रम की सफलता इस बात का प्रमाण है कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को उचित अवसर, प्रशिक्षण और जिम्मेदारी मिलने पर वे आर्थिक प्रगति के साथ सार्वजनिक सेवाओं को भी अधिक प्रभावी बना सकती हैं। यह कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, उनकी सामाजिक भागीदारी बढ़ाने और गांवों में सेवा वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

