सतीश पुरोहित
भोपाल। भगवद्गीता के आध्यात्मिक एवं दार्शनिक संदेशों को बुन्देली लोकभाषा में अभिव्यक्त करने का सराहनीय प्रयास करने के लिए राजधानी की विदुषी लेखिका डॉ. रेणु श्रीवास्तव को लोकभाषा सम्मान से सम्मानित किया गया है। स्वर्गीय डॉ. पूरन चन्द्र श्रीवास्तव की स्मृति में दिया जाने वाला यह सम्मान इस वर्ष ‘‘बुन्देली गीता’’ कृति के लिए प्रदान किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था कादम्बरी द्वारा यह सम्मान लोकभाषा एवं साहित्य के प्रति समर्पित रचनाकारों के योगदान को रेखांकित करने के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और साहित्यिक प्रतिष्ठा को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लेखकों को प्रदान किया जाता है।
इस वर्ष साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. रेणु को प्रतिष्ठित ‘स्व. डॉ. पूरन चन्द्र स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें उनकी साहित्यिक कृति ‘बुन्देली गीता’ के लिए लोकभाषा संवर्धन एवं साहित्यिक अभिव्यक्ति के क्षेत्र में प्रदान किया गया।
सम्मान स्वरूप डॉ. रेणु को प्रशस्ति पत्र शाल एवं 2,100 की नकद राशि भेंट की गई। उनकी कृति ‘बुन्देली गीता’ कृति भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना तथा लोकभाषा की समृद्ध परंपरा को जनमानस तक पहुँचाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
डॉ. रेणु की इस उपलब्धि से साहित्यिक जगत में हर्ष का वातावरण है। यह सम्मान उनके साहित्यिक अवदान तथा बुन्देली भाषा के प्रति उनकी निष्ठा और समर्पण का गौरवपूर्ण प्रमाण है। इस उपलब्धि के लिए लेखिका डॉ. रेणु को कई साहित्यकारों, लेखकों, शुभचिंतकों और सहेलियों द्वारा बधाई प्रेषित की जा रही है। लेखिका ने इस सम्मान के लिए सभी की बधाई और शुभकामनाओं के लिए आभार व्यक्त किया।

