श्रीकांत त्रिवेदी,”प्रांजल” लखनऊ
कलम आज कुछ ऐसा लिख!
महा रास के जैसा लिख!!
प्रेमभूमि बरसाने सी लिख,
मन वृंदावन जैसा लिख!!
कलम आज कुछ ऐसा लिख!
राधा के पायल की छन छन,
कंगन की,चूड़ी की खनखन,
पांवों के नूपुर की रुनझुन,
सप्तम स्वर के जैसा लिख !
कलम आज कुछ ऐसा लिख!
गोकुल का महका सा उपवन,
नंद यशोदा का जीवन धन,
मोहन का मोहक चंचलपन,
यमुना जल के जैसा लिख!
कलम आज कुछ ऐसा लिख!
शरद पूर्णिमा की रजनी में,
निधिवन की पावन धरनी में,
सभी गोपियां सुध बुध भूलीं,
वंशी के स्वर जैसा लिख!
कलम आज कुछ ऐसा लिख!
पूर्ण चंद्र था नील गगन में,
हरसिंगार की महक पवन में,
कृष्ण समाए सबके मन में ,
मन मधुवन हो ऐसा लिख!!
कलम आज कुछ ऐसा लिख!
हर गोपी के संग में मोहन,
राधा के अंग अंग में मोहन,
यमुना तट कण कण में मोहन,
श्रृष्टि कृष्ण मय ऐसा लिख!
कलम आज कुछ ऐसा लिख!
कृष्ण हो रहे थे राधा मय,
राधा सदा सदा मोहन मय,
सुध बुध भूले सभी देव गण,
रास अलौकिक ऐसा लिख!
कलम आज कुछ ऐसा लिख!
कलम आज कुछ ऐसा लिख!!

