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महानिदेशक डॉ. संजय सिंह ने साझा की अनुसंधान एवं नवाचारों की रूप-रेखा

उत्पादकता से आगेः उत्तर प्रदेश की कृषि के भविष्य की पुनर्कल्पना विषय पर देशभर के वैज्ञानिक और नीति-निर्माता करेंगे मंथन

पराली प्रबंधन के लिए ’हेलोकेयर’ बायो-फॉर्मूलेशन, कालानमक की उन्नत किस्में और मक्का-मिलेट्स पर परिषद ने हासिल की ऐतिहासिक उपलब्धियां

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही होंगे मुख्य अतिथि; 27 अक्टूबर को भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान में जुटेगा कृषि जगत

सुरेन्द्र अग्निहोत्री

लखनऊ: 22 अक्टूबर, 2026

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के 37वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आगामी 27 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाली एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी की रूप-रेखा और परिषद की शोध उपलब्धियों को साझा करने हेतु गुरुवार को उपकार सभागार (करियप्पा मार्ग, आलमबाग) लखनऊ में एक विशेष प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उपकार के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह ने बताया कि इस वर्ष राष्ट्रीय संगोष्ठी का मुख्य विषय ’उत्पादकता से आगेः उत्तर प्रदेश की कृषि के भविष्य की पुनर्कल्पना’ निर्धारित किया गया है। संगोष्ठी का भव्य आयोजन 27 अक्टूबर को आईसीएआर-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (प्प्ैत्), रायबरेली रोड, लखनऊ के सभागार में संपन्न होगा।
महानिदेशक ने बताया कि संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में केवल फसल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित न रहकर जलवायु परिवर्तन के अनुकूल खेती, डिजिटल तकनीक, फसल अवशेष प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, प्राकृतिक खेती और कृषक उत्पादक संगठनों (थ्च्व्) के माध्यम से किसानों की आय में स्थायी वृद्धि की ठोस रणनीतियां तैयार करना है।
महानिदेशक डॉ. संजय सिंह ने बताया कि 27 अक्टूबर को आयोजित होने वाले उद्घाटन सत्र में प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख, उद्यान एवं कृषि विपणन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह, उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष आचार्य श्याम बिहारी गुप्ता, कृषि उत्पादन आयुक्त (।च्ब्) दीपक कुमार तथा कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के प्रमुख सचिव डॉ. एम. के. शनमुगा सुंदरम प्रतिभाग करेंगे। कार्यक्रम का स्वागत संबोधन उपकार के अध्यक्ष कैप्टन विकास गुप्ता द्वारा दिया जाएगा। इस अवसर पर शोध पुस्तकों का विमोचन तथा कृषि वैज्ञानिकों व प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया जाएगा।
संगोष्ठी के दौरान कृषि क्षेत्र की समकालीन चुनौतियों और भविष्य की प्राथमिकताओं पर पांच समानांतर तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें जलवायु अनुकूल प्रजनन तकनीक सत्र के अंतर्गत मौसमी फसलों की उत्पादकता और किस्म सुधार पर विशेषज्ञों का विमर्श होगा। डिजिटल कृषि एवं पादप सुरक्षा सत्र में तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए सटीक व सुरक्षित फसल प्रबंधन पर चर्चा की जाएगी। प्राकृतिक संसाधनों का इष्टतम प्रबंधन सत्र के माध्यम से टिकाऊ और अधिकतम उपज के लिए मृदा व जल संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। जलवायु अनुकूल पशुधन सत्र में दुग्ध उत्पादन, उन्नत चारा और देसी नस्ल सुधार के सतत मॉडल प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके अलावा, नेक्स्ट-जेन एग्रीकल्चर एवं एफपीओ सत्र में कृषक उत्पादक संगठनों के माध्यम से कृषि को बाजार से जोड़कर व्यापक प्रभाव सृजित करने पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
महानिदेशक ने प्रदेश में कृषि अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और नीतिगत पहलों के अंतर्गत परिषद द्वारा हाल के वर्षों में अर्जित ऐतिहासिक उपलब्धियों का विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत किया। फसल सुधार के तहत जैविक खेती के लिए अनुकूल चावल की ’मालवीय सुगंध धान-104’ व ’मालवीय धान-106’ तथा जीआई-टैग प्राप्त कालानमक चावल की ’पूसा नरेन्द्र के.एन.-1’ और ’पूसा सी.आर.डी.के.एन.-2’ जैसी उच्च उपज व सुगंध वाली किस्में विकसित की गई हैं। उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरुद्धार कार्यक्रम के तहत रागी की ’यूपी-80’ और ’जेएच-36’ किस्में चिन्हित की गई हैं, जबकि बाजरा की 5 किस्में परीक्षण में हैं। सिमिट के सहयोग से संकर मक्का किस्में ’कलिंगराज’ व ’आरसीआरएमएच-2’ का बीज उत्पादन कराया गया है और दलहन में अरहर की 74 देशी किस्मों के संरक्षण के साथ ’रहमुनिया’, ’बालुंधा’ व ’चिंगारी’ किस्में विकसित की गई हैं। तकनीकी नवाचार और पराली प्रबंधन के क्षेत्र में, केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के सहयोग से ’हेलोकेयर’ जैव फॉर्मूलेशन विकसित किया गया है जो 21 से 24 दिनों में पराली को अपघटित कर देता है, तथा ट्राइकोडर्मा आधारित सिल्वर नैनोकणों और फल मक्खी कीट नियंत्रण के फॉर्मूलेशन तैयार किए गए हैं। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए इक्रिसैट के सहयोग से बुंदेलखंड में वृहद भू-जल पुनर्भरण कार्य कराया गया है। उद्यमिता और स्टार्टअप को बढ़ावा देने हेतु ’उपकार-सीड’ की शुरुआत करने के साथ चार कृषि विश्वविद्यालयों और रहमानखेड़ा में एग्री-बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर संचालित किए जा रहे हैं, सीतापुर, बहराइच, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी और हरदोई में ’मखाना विकास परियोजना’ चलाई जा रही है, विश्व बैंक समर्थित परियोजना में पर्यावरण अनुकूल डाटा तैयार हो रहा है, और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 9,600 से अधिक युवाओं को कृषि प्रशिक्षण दिया जा रहा है। किसानों को डिजिटल परामर्श देने के लिए ’क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप’ की सिफारिशें ’दर्शन पोर्टल’ के माध्यम से पहुंचाई जा रही हैं, और कृषि नीति में अग्रणी भूमिका के लिए परिषद को राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल द्वारा ’स्टेट एक्सीलेंस अवॉर्ड 2026श्’ से सम्मानित किया जा चुका है। महानिदेशक ने विश्वास व्यक्त किया कि 27 अक्टूबर को आयोजित होने वाली यह राष्ट्रीय संगोष्ठी प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने और कृषि को तकनीकी रूप से समृद्ध व टिकाऊ बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।

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