लखनऊ, 05 नवंबर 2026उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में दिनांक 04 नवम्बर, 2026 को प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय, प्रयागराज एवं डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय, प्रयागराज में पूर्वांचल स्टार्टअप संवाद-2026 का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कुलाधिपति जी द्वारा विश्वविद्यालय की नवीन शैक्षिक सुविधाओं का लोकार्पण तथा स्टार्टअप प्रदर्शनी का उद्घाटन एवं अवलोकन किया गया।
कुलाधिपति महोदया ने आइडियाथॉन के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय, प्रयागराज एवं डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ के मध्य एमओयू भी संपन्न हुआ।
कुलाधिपति महोदया की अध्यक्षता में कुलपति गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया। इस बैठक में प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, कुलसचिवों एवं वरिष्ठ शिक्षाविदों ने प्रतिभाग किया। गोलमेज सम्मेलन में पूर्वांचल क्षेत्र में नवाचार, स्टार्टअप इकोसिस्टम के सुदृढ़ीकरण, विश्वविद्यालयों में इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना तथा विद्यार्थियों के आइडियाज को उद्योगों से जोड़ने के विषय पर गहन चर्चा हुई।
कुलाधिपति महोदया ने इस अवसर पर सभी विश्वविद्यालयों को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान किए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय अपने परिसर में इनोवेशन हब एवं इन्क्यूबेशन सेंटर को सक्रिय करे। पाठ्यक्रमों में डिजाइन थिंकिंग, उद्यमिता एवं कौशल विकास को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। विद्यार्थियों के नवीन आइडियाज को पेटेंट एवं प्रोटोटाइप तक ले जाने में विश्वविद्यालय पूरा सहयोग करें। ग्रामीण पृष्ठभूमि एवं स्थानीय समस्याओं पर आधारित स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन दिया जाए।
कुलाधिपति महोदया ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित न रहें, बल्कि स्टार्टअप और रोजगार सृजन के केंद्र के रूप में विकसित हों। उन्होंने जन भवन के स्तर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
राज्यपाल महोदया ने विश्वविद्यालय के फिटनेस स्टूडियो का भ्रमण किया। इस दौरान उनके समक्ष विश्वविद्यालय की एक छात्रा ने 145 किलोग्राम वजन उठाया, जिसकी राज्यपाल महोदया ने प्रशंसा की। इस अवसर पर सिडबी के उप महाप्रबंधक श्री प्रत्यूष मिश्र, निवेशक श्री अमित सिंघल सहित अन्य सफल स्टार्टअप संस्थापकों के साथ पैनल डिस्कशन भी आयोजित किया गया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलाधिपति जी ने विद्यार्थियों को नवाचार के लिए प्रेरित किया। उन्होंने गुजरात और महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए जल संकट की समस्या पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार गुजरात में जल की गंभीर समस्या थी और जनभागीदारी एवं नवाचार के माध्यम से उसका स्थायी समाधान निकाला गया। इसी प्रकार महाराष्ट्र में जल प्रबंधन के प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समस्याएं ही नवाचार को जन्म देती हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे अपने आसपास की समस्याओं, जैसे पानी, कचरा प्रबंधन, कृषि एवं स्वास्थ्य को अपने स्टार्टअप आइडियाज का आधार बनाएं। इन समस्याओं के समाधान के माध्यम से ही सफल उद्यमी बना जा सकता है। राज्यपाल महोदया ने सही समस्या के चयन, महिला सशक्तिकरण एवं वर्क कल्चर में सुधार पर विशेष बल दिया।
राज्यपाल महोदया ने समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए तकनीक एवं नवाचार के प्रयोग पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि असहाय लोगों को तत्काल सहायता पहुंचाने तथा बेघर लोगों को मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विशेष सर्च ऐप विकसित किए गए हैं, जिनके माध्यम से एक कॉल पर मदद पहुंचाई जाती है। महिला सशक्तिकरण का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि 80 हजार महिलाओं को विभिन्न कौशलों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया गया है। यह दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन मिलने पर कोई भी व्यक्ति सीखकर आगे बढ़ सकता है।
राज्यपाल महोदया ने युवाओं एवं शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि किसी भी कार्य की शुरुआत में सही समस्या का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि निष्फलता ही सफलता की चाबी होती है और हमें हमेशा सीखने की जिज्ञासा बनाए रखनी चाहिए। वर्क कल्चर में सुधार पर बल देते हुए उन्होंने सभी कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा एवं स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए स्टूडेंट लोन एवं व्यावसायिक ऋण का सही उपयोग करने का आह्वान किया। राज्यपाल महोदया ने समझाया कि कार्य प्रारंभ करने के बाद आने वाली कठिनाइयों से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि धैर्य, निरंतरता एवं सकारात्मक सोच के साथ कार्य करना चाहिए। सफलता निश्चित रूप से मिलती है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें और विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
राज्यपाल जी के विशेष कार्याधिकारी (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ. सुधीर एम. बोबडे ने कहा कि नीति के माध्यम से नवाचार एवं नए आइडियाज को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वाराणसी, अयोध्या एवं मथुरा जैसे नगरों में पर्यटन को स्टार्टअप से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने पूर्वांचल के ैॅव्ज् विश्लेषण एवं जन भवन के समन्वय से विश्वविद्यालय नेटवर्क समर्थ से सामर्थ्य पर अपने विचार साझा किए।
प्रो. जय प्रकाश पाण्डेय कुलपति ए.के.टी.यू., लखनऊ ने पूर्वांचल स्टार्टअप संवाद की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि एप्पल, गूगल, फेसबुक एवं व्हाट्सएप जैसे वैश्विक प्लेटफॉर्म स्टार्टअप के रूप में ही प्रारंभ हुए और आज सफलता के शिखर पर हैं। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में स्टार्टअप्स की निर्णायक भूमिका होगी। उन्होंने फिजिक्स वाला जैसे स्वदेशी स्टार्टअप का उदाहरण देते हुए युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित किया।
तकनीकी सत्रों के प्रथम सत्र में डॉ. अभय जेरे ने डिजाइन थिंकिंग एवं नवाचार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शोधार्थियों के नवीन विचारों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। फेल अर्ली, फेल फास्ट की अवधारणा समझाते हुए उन्होंने कू ऐप की विफलता पर चर्चा की तथा सभी विश्वविद्यालयों में 1-2 सप्ताह का अनिवार्य डिजाइन थिंकिंग कोर्स शुरू करने का आह्वान किया।
द्वितीय सत्र में श्री सुमित राजेश महाजन सीईओ, यूपी स्टार्टअप मिशन ने डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए सीड कैपिटल, प्रोटोटाइप अनुदान, 40 करोड़ रुपये तक के पेशेंस कैपिटल तथा आर एंड डी और कम्प्यूट पावर पर मिलने वाले वित्तीय प्रोत्साहनों की जानकारी दी।
तृतीय सत्र में प्रो. एस.पी. मिश्र, एडवाइजर, इनोवेशन हब, ए.के.टी.यू. ने प्रत्येक कॉलेज एवं विश्वविद्यालय में इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित करने पर जोर दिया। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि आज पूर्वांचल क्षेत्र को स्टार्टअप्स की अत्यधिक आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल अपने स्टार्टअप विचार लेकर आएं, शेष सभी व्यवस्थाओं के लिए उन्हें पूरा सहयोग दिया जाएगा।
कार्यक्रम में लगभग 1200 प्रतिभागियों, सम्बद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यगण एवं विश्वविद्यालय के समस्त शिक्षकगण की गरिमामयी उपस्थिति रही।
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