राम मनोहर त्रिपाठी
बुंदेलखंड अपनो गौरवमयी इतिहास और बीर गाथाओं के लाने तो जानोई जात है, पे इते को खान-पान और पारंपरिक व्यंजन भी पूरे देस में अपनी एक अलग पहचान रखत हैं। बुंदेली माटी की सोंधी महक इते के हर एक पकवान में साफ झलकत है। बुंदेलखंड में मौसम के हिसाब से और घर में आसानी से मिलबे वाली चीजन से ऐसो सुवाद वालो भोजन तैयार करो जात है, जो सेहत के लाने भी बहुत फायेदेमंद होत है।
आओ आज बात करत हैं बुंदेलखंड के कुछ मुख्य और पारंपरिक व्यंजनो के बारे में:
- ठरिया और महुआ के पकवान
बुंदेलखंड के देहाती इलाकों में महुआ को बहुत महत्व है। महुआ से कई तरह के पकवान बनाए जात हैं:
लाटा: महुआ को सुखाके, कूटके और ओमें तिल या अलसी मिलाकर ‘लाटा’ बनाओ जात है। ईको सुवाद बहुत मीठो और अनोखो होत है।
पुआ और गुझिया: महुआ के रस (रसबस) में आटा सानके मीठे पुआ और गुझिया बनाई जाती हैं, जो त्योहारन पे खास तौर से बनत हैं।
- बरेही (मंगौड़ी) और कढ़ी
बुंदेलखंड में मूंग और उरद की दाल को खूब चलन है।
बरेही: उरद की दाल को पीसके, ओमें मसाले मिलाके तेल में छानो जात है। ईको दही के साथ ‘दही-बड़ा’ या फिर रसदार सब्जी में डालके खाओ जात है।
मंगौड़ी: मूंग की दाल में हरी मिर्च, धनिया और प्याज मिलाकर कुरकुरी मंगौड़ी बनाई जाती हैं, जो जाड़न (सर्दियों) के मौसम में चाय के साथ सबको बहुत भाती हैं।
बुंदेली कढ़ी: इते की कढ़ी में मठा (मट्ठा) को ज्यादा इस्तेमाल होत है और ओमें बेसन के फूले-फूले भजिया डाले जाते हैं।
- थुली और लपसी (मीठे व्यंजन)
थुली (दलिया): गेहूं को दरके (मोटा पीसके) दूध और गुड़ के साथ धीमी आंच पे पकाओ जात है। जे बीमारन के लाने और कमजोरी दूर करने के लाने सबसे बढ़िया टॉनिक मानो जात है।
लपसी: गेहूं के आटा को घी में भूनके, गुड़ के पानी में पकाओ जात है। जे कोई भी शुभ काम या पूजा-पाठ में प्रसाद के रूप में जरूर बनत है।
- कद्दु (कुमड़ा) की सब्जी और पूड़ी
बुंदेलखंड की शादियों और पंगतन (दावतों) में कुमड़ा (कद्दू) की खट्टी-मीठी सब्जी और खस्ता पूड़ी को होना बहुत जरूरी है। इसके बिना कोई भी नेवता (दावत) पूरो नहीं मानो जात। ई सब्जी में मेथी को छौंक लगाओ जात है, जो एक अलगई महक देती है।
- गठे (भटे) को भरता और टिक्कर
जाड़न के दिनों में जब खेतों में ताजे भटे (बैंगन) होते हैं, तब भटे को भरता और मोटी-मोटी टिक्कर (अंगारों पे सिकी मोटी रोटी) बनाई जाती है।
भटे को सीधे कंडा (उपले) की आग में भूंजो जात है।
ओमें कच्चो सरसों को तेल, लहसुन, हरी मिर्च और हरा धनिया मिलाके जो भरता बनत है, ओको सुवाद उंगलियां चाटत रख देवे।
- पनघटा और मठा (मट्ठा)
बुंदेलखंड में गर्मी के दिनों में लू से बचने के लाने पनघटा (कच्ची अमिया को पन्ना) और जीरा-हींग डला हुआ मठा हर घर में मिलत है। जे पेट को ठंडा रखत है और पाचन दुरुस्त रखत है।
ई तरह से बुंदेलखंड के व्यंजन भलेई दिखबे में बहुत सादे लगें, पर इनमें सेहत को खजानो छुपो है। आज के नए जमाने के फास्ट फूड के सामने हमारो पारंपरिक बुंदेली खान-पान बहुतई ज्यादा पौष्टिक और सुवाद से भरो है। हमें अपनी ई धरोहर को बचाके रखना चाहिए और अपनी नई पीढ़ी को भी ईके सुवाद से परिचित कराना चाहिए।
जय बुंदेलखंड!

