सुरेन्द्र अग्निहोत्री
लखनऊ: 24 अक्टूबर, 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि विज्ञान और टेक्नोलॉजी तभी मानवता के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकती हैं, जब वह भारतीय मनीषा, विवेक और लोककल्याण की भावना का प्रतिनिधित्व करें। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए0आई0) हमारे लिए शीघ्र निर्णय लेने और समस्याओं के समाधान में सहायक हो सकती है, लेकिन उसे हमारा निर्णायक नहीं बनना चाहिए। ए0आई0 का संचालन हमारे विवेक के आधार पर होना चाहिए, न कि हमें उसके निर्णयों के भरोसे हो जाना चाहिए। टेक्नोलॉजी का उद्देश्य मानव जीवन को बेहतर बनाना, न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करना और समाज को सुरक्षित बनाना होना चाहिए।
मुख्यमंत्री जी आज यहां उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में टेकसंगम-2026 अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन के द्वितीय दिवस के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने क्वाण्टम फॉरेंसिक और विधिक अनुपालन पर आधारित लेक्सक्यू सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स तथा कन्सेण्ट मैनेजमेंट पोर्टल का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री जी ने ‘ए0आई0 इन कन्सट्रक्शन’ पुस्तक का विमोचन किया तथा ‘अभेद’ पहल की आधारशिला रखी। मुख्यमंत्री जी के समक्ष शिक्षा, टेक्नोलॉजी, फॉरेंसिक साइंस और कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए यू0पी0एस0आई0एफ0एस0 तथा 10 प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय संस्थानों के मध्य एम0ओ0यू0 का आदान-प्रदान किया गया। कार्यक्रम के दौरान यू0पी0एस0आई0एफ0एस0 की परिकल्पना, प्रगति तथा संकल्प पर आधारित एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गयी।
ज्ञातव्य है कि तीन दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन टेकसंगम-2026 ए0आई0, साइबर फॉरेंसिक, क्वाण्टम प्रौद्योगिकी, डेटा संरक्षण एवं विधिक अनुपालन का एकीकरण विषय पर आधारित है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि संगम का सम्बन्ध उत्तर प्रदेश से बहुत पहले से रहा है। वर्ष 2025 में प्रयागराज में आयोजित महाकुम्भ के माध्यम से दुनिया ने उत्तर प्रदेश की क्षमता, सांस्कृतिक चेतना और व्यापक आयोजन-क्षमता को देखा। प्रयागराज का महाकुम्भ गंगा और यमुना के साथ अदृश्य सरस्वती के संगम का प्रतीक है। इसी प्रकार टेकसंगम भी विज्ञान, टेक्नोलॉजी और भारतीय मनीषा के समन्वय की एक नई दृष्टि प्रस्तुत करता है।
यदि गंगा की तुलना विज्ञान और यमुना की तुलना टेक्नोलॉजी से करें, तो ये दोनों तभी मानव कल्याण के लिए उपयोगी हो सकती हैं, जब इनके साथ भारतीय ज्ञान-परम्परा के विवेक और लोककल्याण की भावना का समन्वय हो। भारतीय परम्परा में कहा गया है-‘विद्या ददाति विनयम्।’ अर्थात विद्या का उद्देश्य विनय है और विनय का उद्देश्य विवेक से पूर्ण होना है। प्रयागराज के महाकुम्भ में विज्ञान और टेक्नोलॉजी के साथ आस्था तथा अदृश्य सरस्वती का भाव भी जुड़ा दिखाई देता है। यही समन्वय टेकसंगम-2026 की भावना में भी परिलक्षित होना चाहिए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि शक्ति व्यक्ति के कल्याण का माध्यम बननी चाहिए, न कि स्वयं उसके संकट का कारण। डिजिटल टेक्नोलॉजी ने हमारी कार्यक्षमता बढ़ाई है और ए0आई0 ने समस्याओं के समाधान की नई सम्भावनाएं खोली हैं। क्वाण्टम कम्प्यूटिंग भविष्य की एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो नई सम्भावनाओं के द्वार खोल सकती है। लेकिन इसके साथ डीपफेक, साइबर फ्रॉड, पहचान की चोरी और डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता जैसी गम्भीर चुनौतियां भी सामने हैं। इसलिए केवल तकनीक विकसित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सुरक्षित, विश्वसनीय और लोकहितकारी बनाना भी आवश्यक है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत सरकार ने ए0आई0 और क्वाण्टम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में मिशन मोड पर कार्य आगे बढ़ाया है। ए0आई0 इण्डिया मिशन के माध्यम से स्वदेशी ए0आई0 क्षमताओं का विकास, कम्प्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, इनोवेशन को प्रोत्साहन तथा सुरक्षित एवं जिम्मेदार ए0आई0 ईकोसिस्टम के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। नेशनल क्वाण्टम मिशन के अन्तर्गत क्वाण्टम कम्प्यूटिंग, क्वाण्टम कम्युनिकेशन, क्वाण्टम सेंसिंग और क्वाण्टम मैटेरियल्स के क्षेत्र में नई रिसर्च, औद्योगिक क्षमता तथा प्रशिक्षित मानव संसाधन विकसित करने की दिशा में कार्य हो रहा है। शासन, अर्थव्यवस्था, नेशनल सिक्योरिटी और न्यायिक व्यवस्था को एक समन्वित प्रणाली के रूप में आगे बढ़ाने में इन तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। टेकसंगम इसी उद्देश्य से ए0आई0, साइबर फॉरेंसिक्स, क्वाण्टम टेक्नोलॉजी और डेटा प्रोटेक्शन जैसे विषयों पर साझा विचार-विमर्श का अवसर प्रदान कर रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि लगभग एक दशक पहले लखनऊ में इस प्रकार के अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन की कल्पना करना भी कठिन था। आज जहां यह संस्थान स्थापित है, उस भूमि पर पहले भू-माफिया ने कब्जा कर लिया था। पुलिस के पास भूमि से सम्बन्धित दस्तावेज उपलब्ध थे, लेकिन उस समय की अव्यवस्था में भू-माफिया के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करना भी चुनौतीपूर्ण था। भूमि के मामले की जानकारी मिलने पर उन्होंने सम्बन्धित अधिकारियों से दस्तावेज मांगे। अभिलेखों की जांच कराई गई, सम्बन्धित विभाग की गलती सामने आने पर एफ0आई0आर0 दर्ज कराते हुए कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। जब मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा, तब भी कार्रवाई जारी रखी गई। अंततः भू-माफिया को पीछे हटना पड़ा और भूमि वापस प्राप्त हुई। इसके बाद यह निर्णय लिया गया कि इस भूमि पर ऐसा संस्थान स्थापित किया जाए, जो उत्तर प्रदेश को नई पहचान दे तथा न्याय व्यवस्था को वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज उसी भूमि पर स्थापित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में देश और दुनिया के विशेषज्ञ ए0आई0, साइबर फॉरेंसिक्स, क्वाण्टम टेक्नोलॉजी तथा डेटा सिक्योरिटी जैसे विषयों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। यह परिवर्तन बताता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, कानून के शासन और सही दिशा में किए गए प्रयासों से प्रदेश में कितना बड़ा बदलाव सम्भव है। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस को एक ऐसे संस्थान के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो विज्ञान और कानून के बीच मजबूत सेतु बने। यहां अध्ययनरत विद्यार्थी भविष्य में वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
टेकसंगम में हुए एम0ओ0यू0, लेक्सक्यू लैब, क्वाण्टम टेक्नोलॉजी सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस, कन्सेण्ट मैनेजमेन्ट फ्रेमवर्क और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञों की सहभागिता भविष्य की शिक्षा, रिसर्च और न्यायिक व्यवस्था को नई दिशा देगी। उत्तर प्रदेश सरकार रिसर्च, इनोवेशन, इंडस्ट्री कोलेबोरेशन और वर्ल्ड-क्लास एजुकेशन के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगी। उन्हांेने विश्वास व्यक्त किया कि इस अन्तरराष्ट्रीय समिट में होने वाला विचार-विमर्श विज्ञान, टेक्नोलॉजी और न्याय व्यवस्था के समन्वय को मजबूत करेगा तथा विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पहले टेलीविजन पर प्रसारित होने वाले सी0आई0डी0 जैसे धारावाहिकों में अपराध की जांच के दौरान बाल के एक टुकड़े या उंगली के निशान जैसे वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अपराधी की पहचान होते हुए दिखाई जाती थी। उस समय ऐसी प्रक्रियाएं आम लोगों को कल्पना जैसी लगती थीं, लेकिन आज फॉरेंसिक साइंस वास्तविक जीवन में अपराध की जांच और न्याय दिलाने का महत्वपूर्ण वैज्ञानिक माध्यम बन रही है। फॉरेंसिक साइंस जो कभी रील लाइफ में था, आज वह रियल लाइफ में हम सबके सामने देखने को मिल रहा है। हमारी ऋषि परम्परा ने शब्द को ब्रह्म माना गया है। पहले विचार आता है, फिर थ्योरी विकसित होता है और उसके बाद उसका व्यावहारिक स्वरूप सामने आता है। विज्ञान और टेक्नोलॉजी भी इसी प्रक्रिया के माध्यम से समाज की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करते हैं।
वर्ष 2017 में दायित्व सम्भालने के बाद की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उस समय डी0एन0ए0 जांच के लिए लिए गए कई सैम्पल लगभग 10 वर्ष पुराने थे। वैज्ञानिक साक्ष्य समय पर उपलब्ध न होने के कारण अपराधियों को बच निकलने का अवसर मिलता था और न्यायालयों में तारीख पर तारीख पड़ती रहती थी। एक ओर साक्ष्यों की कमी थी, दूसरी ओर वैज्ञानिक नमूनों को सुरक्षित रखने और समय पर उनकी जांच सुनिश्चित करने की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं थी। उन्होंने प्रदेश के एक माफिया का उदाहरण देते हुए बताया कि उसने वर्ष 1980 में पहला अपराध किया था। वर्ष 2017 में उसके विरुद्ध कार्रवाई प्रारम्भ हुई, लेकिन उसे दूसरे राज्य में स्थानान्तरित कर दिए जाने के कारण वापस लाने और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने में लगभग तीन वर्ष लग गए। सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। सभी साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने के बाद उसे 42 वर्ष बाद सजा मिली।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यदि अपराध के समय ही वैज्ञानिक साक्ष्य सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से उपलब्ध हों, तो पीड़ितों को न्याय के लिए दशकों तक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी और आम नागरिक का व्यवस्था पर विश्वास मजबूत होगा। प्रदेश में फॉरेंसिक साइंस की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रत्येक रेंज में फॉरेंसिक लैब स्थापना का कार्य आगे बढ़ाया गया। उत्तर प्रदेश की 12 रेंज में 12 फॉरेंसिक साइंस लैब तैयार हो चुकी हैं और 06 अन्य लैब अन्तिम चरण में हैं।
नए आपराधिक कानूनों के अन्तर्गत 07 वर्ष से अधिक की सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य की आवश्यकता को देखते हुए सैम्पल कलेक्शन और वैज्ञानिक जांच की क्षमता बढ़ाना जरूरी था। केन्द्रीय गृह मंत्रालय और राज्य सरकार के प्रयासों से फॉरेंसिक वैन की व्यवस्था भी मजबूत की गई है। आज प्रदेश में 150 से अधिक फॉरेंसिक वैन उपलब्ध हैं। प्रदेश में फॉरेंसिक लैब के सक्रिय होने से घटनास्थल से सैम्पल लेने, उन्हें सम्बन्धित प्रयोगशाला तक पहुंचाने और न्यायालय में वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को गति मिली है। इससे अपराधियों को समय पर सजा दिलाने में मदद मिल सकती है और पीड़ितों को दशकों तक न्याय की प्रतीक्षा करने की स्थिति से राहत मिल सकती है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जब फॉरेंसिक वैन की व्यवस्था शुरू हुई, तब अधिकारियों ने लगभग 700 फॉरेंसिक विशेषज्ञों की आवश्यकता बताई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विशेषज्ञों की नियुक्ति से पहले यह निर्धारित करना जरूरी है कि किस प्रकार के विशेषज्ञ चाहिए-डिग्रीधारी, डिप्लोमाधारी, सर्टिफिकेट प्राप्त प्रशिक्षित कर्मी, सैम्पल कलेक्शन टेक्नीशियन अथवा प्रयोगशाला में काम करने वाले विशेषज्ञ। इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में प्रशिक्षण की व्यवस्था विकसित की गई। अब तक लगभग 1,000 पुलिस अधिकारियों को संस्थान में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। फॉरेंसिक साइंस में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, ताकि प्रदेश को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो सके।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि संस्थान की प्रयोगशालाओं को विश्वस्तरीय बनाने का प्रयास किया गया है, जिससे उत्तर प्रदेश के थानों और न्यायालयों को वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध कराने में सहायता मिल सके। संस्थान में तैयार की गई प्रयोगशालाओं का उद्देश्य केवल औपचारिकता पूरी करना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक जांच के माध्यम से सत्य को सामने लाना और न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाना है। न्याय की विश्वसनीयता के लिए कानून को विज्ञान की समझ होनी चाहिए और विज्ञान को न्याय की कसौटी पर खरा उतरने के लिए तैयार रहना चाहिए। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। यू0पी0एस0आई0एफ0एस0 की लॉ विद लैब पहल कानून और विज्ञान के बीच समन्वय को संस्थागत स्वरूप देने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में लेक्सक्यू लैब की पहल की गई है, जो कानून और क्वाण्टम टेक्नोलॉजी को फॉरेंसिक साइंस तथा लोकहित से जोड़ने का प्रयास है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि लेक्सक्यू में एम0टेक का शॉर्ट-टर्म प्रोफेशनल कोर्स, संयुक्त रिसर्च, इण्डस्ट्री आधारित लैब, स्टार्टअप सपोर्ट और पॉलिसी एडवाइजरी जैसी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की सम्भावनाएं हैं। यह पहल राष्ट्रीय क्वाण्टम मिशन में उत्तर प्रदेश के योगदान को मजबूत कर सकती है। प्रदेश अपनी बड़ी आबादी के साथ-साथ अपनी औद्योगिक, शैक्षिक और तकनीकी क्षमता के माध्यम से विकसित भारत के संकल्प में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि टेकसंगम के दौरान हुए एम0ओ0यू0 इण्डस्ट्री-अकादमिक पार्टनरशिप का महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। इनके माध्यम से यूनिवर्सिटी ऑफ इण्डियानापोलिस, यू0एस0ए0 के फॉरेंसिक साइंस से जुड़े विशेषज्ञों तथा डिजिटल इण्डिया कॉरपोरेशन, सी-डैक, एस0टी0पी0आई0, आई0आई0टी0 और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों सहित विभिन्न संस्थानों के साथ ज्ञान-साझेदारी और सहयोग के नए अवसर विकसित होंगे। इन समझौतों से स्टूडेण्ट एवं फैकल्टी एक्सचेंज, संयुक्त सर्टिफिकेशन, रिसर्च और वैश्विक स्तर पर एक्सपोजर के नए रास्ते खुल सकते हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार रिसर्च, इनोवेशन, इण्डस्ट्री कोलेबोरेशन और वर्ल्ड-क्लास एजुकेशन के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इस संस्थान में अध्ययन कर रहे विद्यार्थी भविष्य में वैज्ञानिक साक्ष्यों के माध्यम से न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अपराधी कहीं भी छिपे हों या डीपफेक का सहारा लें, वैज्ञानिक जांच और विश्वसनीय साक्ष्य के आधार पर उन्हें कानून के दायरे में लाने की क्षमता विकसित करना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के अन्तर्गत कन्सेण्ट मैनेजमेन्ट सिस्टम को लागू करने की दिशा में उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस ने महत्वपूर्ण पहल की है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कहा था कि डेटा इज द न्यू ऑयल। उत्तर प्रदेश को भारत के प्रमुख ए0आई0 और डेटा सेन्टर हब के रूप में विकसित करने की दिशा में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। डेटा आज के समय का नया संसाधन है। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा की सुरक्षा, नागरिकों की निजता और उनकी सहमति का महत्व भी बढ़ा है। कन्सेण्ट मैनेजमेन्ट पोर्टल का शुभारम्भ डिजिटल संरक्षण और डेटा प्रोटेक्शन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साइबर सुरक्षा, डिजिटल संरक्षण और उन्नत टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में संस्थागत सहयोग से नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। लेक्सक्यू लैब, कन्सेण्ट मैनेजमेन्ट फ्रेमवर्क और अन्तरराष्ट्रीय समिट भविष्य की शिक्षा तथा न्यायिक व्यवस्था को नई दिशा देने में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 से पहले कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक प्रतिक्रिया को लेकर अनेक चुनौतियां थीं। कई बार अपराध होने के बाद पीड़ितों को तत्काल सहायता नहीं मिल पाती थी। आज प्रदेश में रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत किया गया है। कमाण्ड एण्ड कण्ट्रोल सेन्टर और ऑपरेशन त्रिनेत्र के माध्यम से विभिन्न गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। किसी घटना के बाद नागरिक द्वारा ‘112’ पर कॉल करने पर पुलिस की पी0आर0वी0 को तत्काल घटनास्थल तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। यह व्यवस्था आम नागरिक के मन में सुरक्षा और विश्वास का भाव मजबूत करती है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में उद्योगों की संख्या लगभग 14,000 बताई जाती थी, जबकि अब लगभग 35,000 उद्योग हैं। आज किसी उद्योग से गुण्डा टैक्स वसूलने या अनावश्यक रूप से बिजली काटने की स्थिति स्वीकार्य नहीं है। प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों के लिए 36 सेक्टोरल पॉलिसी बनाई गई हैं। लगभग 75,000 एकड़ का लैंड बैंक उपलब्ध है। सिंगल विण्डो क्लीयरेन्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से निवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं को सुगम बनाया गया है। इससे प्रदेश को लगभग 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। पर्याप्त बिजली, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर और कुशल युवा मानव संसाधन के कारण उत्तर प्रदेश निवेश के महत्वपूर्ण केन्द्र के रूप में उभरा है। वर्ष 2017 से पहले जहां निवेशक लखनऊ आने से भी हिचकते थे, वहीं आज देश-दुनिया के विशेषज्ञ और उद्योग जगत के प्रतिनिधि प्रदेश में आयोजित अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग ले रहे हैं। यह बदलाव कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक व्यवस्था और निवेश के अनुकूल माहौल का परिणाम है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश लगातार विगत 07 वर्षों से रेवेन्यू सरप्लस स्टेट के रूप में अपनी विकास यात्रा को आगे बढ़ा रहा है। प्रदेश ने अपने स्टेट जी0डी0पी0, बजट और प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। विगत साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश का बजट और प्रति व्यक्ति आय लगभग तीन गुना करने में सफलता मिली है। उत्तर प्रदेश का बजट देश के राज्यों में सबसे बड़ा है और प्रदेश कैपिटल एक्सपेंडिचर के माध्यम से इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा सर्कुलर इकोनॉमी को गति दे रहा है। प्रदेश में लगभग 02 लाख करोड़ रुपये कैपिटल एक्सपेंडिचर पर खर्च किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर भारत की पहली चिप फैक्ट्री अर्थात विश्वस्तरीय सेमीकण्डक्टर फैब यूनिट सम्बन्धी कार्य को नोएडा में आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश में डेटा सेन्टर, ए0आई0 और टेक्नोलॉजी से जुड़ी क्षमताओं के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। वर्तमान में देश की डेटा सेन्टर क्षमता लगभग 1.6 गीगावॉट के स्तर पर है। उत्तर प्रदेश का लक्ष्य वर्ष 2030 तक प्रदेश में 05 गीगावॉट डेटा सेन्टर क्षमता विकसित करना है। इसके लिए 05 बड़े डेटा सेन्टर क्लस्टर का मजबूत नेटवर्क तैयार करने की दिशा में कार्य हो रहा है। इससे निवेश, इनोवेशन, उद्योग और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
प्रदेश में युवाओं के लिए अवसरों का विस्तार हुआ है। कभी उत्तर प्रदेश के युवा रोजगार के लिए दूसरे शहरों और देशों की ओर जाते थे, लेकिन आज प्रदेश में ही नई सम्भावनाएं विकसित हो रही हैं। लखनऊ में देश की पहली ए0आई0 सिटी विकसित करने, एस0टी0पी0आई0 के विस्तार और सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने लखनऊ स्थित एच0सी0एल0 सेन्टर का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2017 में वहां लगभग 100 लोग कार्य कर रहे थे। हाल ही में जब वह सेन्टर पहुंचे, तो वहां काम करने वाले लोगों की संख्या लगभग 12,600 हो चुकी थी। एक ही परिसर में बड़ी संख्या में युवा काम कर रहे हैं और नई क्षमता के विस्तार के साथ नियुक्तियां भी जारी हैं। यह बदलाव बताता है कि उत्तर प्रदेश में रोजगार और उद्योग के अवसर किस प्रकार बढ़े हैं। अब वहां तीन शिफ्टों में काम होता है और रात में भी कर्मचारी कार्य करते हैं। महिला कर्मचारियों से बातचीत के दौरान उन्होंने पूछा कि क्या उन्हें नाइट शिफ्ट में काम करने में कोई परेशानी होती है। महिला कर्मचारियों ने बताया कि रात 12 बजे शिफ्ट समाप्त होने पर भी वे लखनऊ, बाराबंकी और उन्नाव सहित अपने घरों तक सुरक्षित पहुंच जाती हैं। वर्ष 2017 से पहले क्या कोई यह कल्पना कर सकता था कि महिलाएं रात की शिफ्ट में इस तरह काम कर सकेंगी। यह बदलाव प्रदेश में सुरक्षा के माहौल और रोजगार के अवसरों में आए परिवर्तन का उदाहरण है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले अयोध्या में बिजली की उपलब्धता सीमित थी और वहां केवल लगभग 03 घण्टे बिजली मिलने की स्थिति थी। वर्ष 2017 में दीपोत्सव प्रारम्भ करने के समय अनेक लोगों ने आशंका जताई थी कि अयोध्या में इतना बड़ा आयोजन सम्भव नहीं होगा और नकारात्मकता का सामना करना पड़ेगा। लेकिन सरकार ने निर्णय लिया कि दीपावली जहां से जुड़ी है, वहां दीपोत्सव भी भव्य रूप से होना चाहिए। आज अयोध्या का दीपोत्सव एक बड़े आयोजन के रूप में स्थापित हो चुका है। इसमें लाखों लोग प्रत्यक्ष रूप से शामिल होते हैं और दुनिया भर के लोग इसे देखते हैं। दीपोत्सव ने अयोध्या को नई पहचान दी है। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भगवान श्रीराम के भव्य मन्दिर का निर्माण हुआ है। अयोध्या में इन्फ्रास्ट्रक्चर का व्यापक विकास हुआ है। पहले जहां संकरी गलियां और सीमित सुविधाएं थीं, आज वहां बेहतर सड़कें, चार और छह लेन की कनेक्टिविटी तथा अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अयोध्या की कनेक्टिविटी में आए बदलाव ने देश-दुनिया के लोगों के लिए वहां पहुंचना आसान बनाया है। पहले जहां अयोध्या में बिजली और परिवहन की सुविधाएं सीमित थीं, वहीं अब 24 घण्टे बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था के साथ अयोध्या को देश की पहली सोलर सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य हुआ है। वहां की स्ट्रीट लाइटों को सौर ऊर्जा से संचालित करने का प्रयास किया गया है। यह विकास अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़ता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेस-वे नेटवर्क और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी ने आवागमन को सुगम बनाया है। पहले गोरखपुर से लखनऊ आने में लगभग 06 घण्टे लगते थे, जबकि आज बेहतर सड़क कनेक्टिविटी के कारण लगभग 03 घण्टे में यह दूरी तय की जा सकती है। वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में केवल 02 अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे थे, जबकि आज 05 अन्तरराष्ट्रीय सहित 17 एयरपोर्ट क्रियाशील हैं। देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में उत्तर प्रदेश की लगभग 60 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इन सुविधाओं से निवेश, पर्यटन, उद्योग और रोजगार को गति मिली है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि टेकसंगम में शामिल देश-दुनिया के विशेषज्ञ उत्तर प्रदेश में आए बदलावों को स्वयं देख सकते हैं। आज प्रदेश केवल अपनी आबादी के कारण नहीं, बल्कि इन्फ्रास्ट्रक्चर, कानून-व्यवस्था, उद्योग, निवेश, टेक्नोलॉजी और कुशल मानव संसाधन के आधार पर भी देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। टेकसंगम का उद्देश्य केवल तकनीकी चर्चा तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके निष्कर्षों को समाज, शासन, अर्थव्यवस्था, नेशनल सिक्योरिटी और न्यायिक व्यवस्था में व्यावहारिक रूप से लागू करने की दिशा में भी प्रयास होने चाहिए। ए0आई0, साइबर फॉरेंसिक्स, क्वाण्टम टेक्नोलॉजी और डेटा प्रोटेक्शन के समन्वय से नई चुनौतियों का समाधान खोजा जा सकता है।
कार्यक्रम को पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कृष्ण, इण्डियानापोलिस यूनिवर्सिटी, यू0एस0ए0 की प्रेसीडेन्ट प्रो0 तनुजा सिंह तथा उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस के निदेशक डॉ0 जी0के0 गोस्वामी ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर विधायक डॉ0 राजेश्वर सिंह, सदस्य नीति आयोग, भारत सरकार प्रो0 अभय करंदीकर, महानिदेशक डिफेंस साइबर एजेंसी, भारत सरकार रियर एडमिरल संजय सचदेवा, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री, गृह एवं सूचना श्री संजय प्रसाद सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

