सतीश पुरोहित
भोपाल। शांति-गया साहित्य, कला एवं खेल संवर्द्धन समिति के वार्षिक सम्मान समारोह में
साहित्य, कला और खेल जगत की 17 विशिष्ट हस्तियों को सम्मानित किया गया। साहित्य
अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार-द्वय गोविंद मिश्र की अध्यक्षता तथा राजेश
जोशी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित समारोह में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश
अनिल वर्मा, प्रख्यात बाल साहित्यकार सुरेंद्र विक्रम (लखनऊ) और स्टार हॉकी खिलाड़ी अशोक
ध्यानचंद विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह दुष्यंत पांडुलिपि संग्रहालय के सभागार
में आयोजित किया गया।
जयपुर के प्रबोध गोविल को शांति-गया स्मृति शिखर सम्मान तथा हॉकी खिलाड़ी अशोक
ध्यानचंद को शांति-गया लाइफटाइम स्पोर्ट्स अचीवमेंट अवॉर्ड प्रदान किया गया। ओडिशा से आए
दिनेश कुमार माली को हरिशंकर श्रीवास्तव स्मृति साहित्य श्री सम्मान और नोएडा के आचार्य
राजेश कुमार को नैली राजेश सिंह स्मृति उपन्यास शिरोमणि सम्मान से सम्मानित किया गया।
अन्य सम्मानित साहित्यकारों में लघुकथा के लिए भोपाल की मनोरमा पंत तथा बाल साहित्य के
लिए डॉ. मालती बसंत (भोपाल) और पद्मा चौगांवकर (गंज बासौदा) शामिल रहीं। कला के क्षेत्र
में भोपाल के सुधीर कुमार पांड्या को नैली राजेश सिंह स्मृति सम्मान प्रदान किया गया। दीपक
गिरकर (इंदौर) और सुदर्शन सोनी (भोपाल) को ललिता देवी स्मृति सम्मान, कर्नल डॉ. गिरिजेश
सक्सेना और डॉ. वर्षा ढोबले (दोनों भोपाल) को शकुंतला मिश्र स्मृति सम्मान तथा लाल देवेंद्र
श्रीवास्तव (बस्ती) और जीनत एहसान कुरैशी (मुंबई) को शकुंतला उर्मलिया स्मृति सम्मान से
सम्मानित किया गया।
अंतरराष्ट्रीय सेलिंग खिलाड़ी एवं द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित कोच जी.एल. यादव को
ज्ञानप्रकाश खरे स्मृति खेल रत्न सम्मान तथा खेल लेखक एवं सांख्यिकीविद् हरीश हर्ष (भिलाई)
को सरोज खरे स्मृति खेल रत्न सम्मान प्रदान किया गया। शिखर सम्मान, साहित्य श्री सम्मान
और कृति सम्मान से सम्मानित साहित्यकारों को अंगवस्त्र, सम्मान राशि, सम्मान-पत्र और
स्मृति-चिह्न भेंट किए गए।
समारोह के मुख्य अतिथि राजेश जोशी ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा, “कई बार व्यक्ति
विधा को नहीं चुनता, विधा उसे चुन लेती है।” उन्होंने अपने जीवन का उदाहरण देते हुए बताया
कि वे चित्रकार बनना चाहते थे, लेकिन कविता ने उन्हें अपना लिया और वे कविता-सृजन में
रम गए।
अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हॉकी खिलाड़ी अशोक ध्यानचंद ने खेल-जगत से जुड़े अपने
अनुभव साझा किए और 1936 के ओलंपिक में मेजर ध्यानचंद की अगुआई में भारतीय टीम की
स्वर्णिम विजय से जुड़े रोचक प्रसंग सुनाए। न्यायमूर्ति अनिल वर्मा ने खेल, क्रांतिकारियों की
जीवनियों और सिनेमा के क्षेत्र में अपने शोधपरक लेखन के अनुभव साझा किए। वहीं, बाल
साहित्यकार सुरेंद्र विक्रम ने बाल साहित्य की दिशा और समाज में उसकी आवश्यकता पर प्रकाश
डाला।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार गोविंद मिश्र ने साहित्य में युवाओं की घटती
रुचि पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि युवा लेखकों की कमी के कारण समकालीन समय
की सोच, संवेदना और आवाज साहित्य में पर्याप्त रूप से दर्ज नहीं हो पा रही है।
सम्मान समारोह से पूर्व आयोजित काव्य गोष्ठी में शहर के नौ कवियों – प्रियदर्शी खैरा,
शशिकांत गीते, रूपाली सक्सेना, कुमार सुरेश, हरिओम श्रीवास्तव, मनोज जैन मधुर, डॉ. मौसमी
परिहार, सलीम सरमद और अवनींद्र अंशुमान, ने अपनी कविताओं का पाठ किया। गोष्ठी की
अध्यक्षता प्रियदर्शी खैरा ने की। गाजियाबाद के वरिष्ठ साहित्यकार श्रवण कुमार उर्मलिया मुख्य
अतिथि तथा बाल साहित्यकार रजनीकांत शुक्ल विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन रहे।
समारोह के दौरान श्रवण कुमार उर्मलिया के उपन्यास आरामगाह व व्यंग्य संग्रह बुद्धिमानी का जहर,
दिनेश कुमार माली के उपन्यास शहीद माधोसिंह बरिहा की खोज तथा अरुण अर्णव खरे के दोहा संग्रह
सात सुर स्नेह के का विमोचन भी किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन घनश्याम मैथिल ‘अमृत’ और
खेल कमेंटेटर दामोदर आर्य ने किया। अंत में कांता राय ने आभार व्यक्त किया।

