सुरेन्द्र अग्निहोत्री
योग, ध्यान, अध्यात्म और दर्शन की भारतीय अनुपम परंपरा के वाहक सोहन सिंह चाइना में पिछले 20 वर्षों से सोहन योगा के माध्यम से योग के चिरंतन रंग और आसन से चीन ही नही अपितु दुनिया भर के लोगों को योग सिखाकर उन्हें जीवन में सुगम, शान्त और अध्यात्म जीवन जीने का अनुभव का अहसास करा रहे है। अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून को हिमालय की यूनाम चोटी पर पहली बार 75 योगासन करके कीर्तिमान स्थापित करने के लिए हिमाचल प्रदेश से 10 जून को हिमशिखर पर्वत पर चढ़ने की यात्रा आरंभ कर 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर भारतीय ध्वज लहराते हुए सारी दुनिया को योग का वैज्ञानिक और अध्यात्मिक संदेश देने निकल रहे। उत्तर प्रदेश के ललितपुर में जन्मे सोहन सिंह से लेखक तथा वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र अग्निहोत्री ने एक लंबी बातचीत की। प्रस्तुत है उस बातचीत के मुख्य अंश-
एक आई टी के प्रोफेसर का योग गुरु बनने के पीछे का रहस्य क्या ?
में जब 23-24 साल पहले नौकरी के लिए विदेश आया तो पारिवारिक स्थित दयनीय थी। मेरी कोशिश रहती थी मेरा आईटी का जो जाँब है उसके अलावा योग की कक्षा लेकर कर्ज चुकाना चाहता था। शाम को 5 बजे जॉब खत्म होता था। तो सात, साढ़े सात से साढ़े आठ बजे तक कही न कही हफ्ता में तीन या चार योग कक्षा लिया करता था।धीरे धीरे योग का प्रभाव गहराता गया और 2013 में विश्वविद्यालय में जब में प्रोफेसर था उस दौरान भीतर से ऐसा अनुभव ऊपर की तरफ आया कि योग में उतर जाने का मन है ।विश्व विद्यालय से प्रोफेसर पद से स्तीफा देकर सोहन इन्टरनेशनल की स्थापना चीन में की, तब से योग ही मेरी इबादत है यही मेरा रोजगार है।
बचपन में आप क्या बनना चाहते थे ?सनातन संस्कृति का कितना प्रभाव था कि आप योग की ओर खिंचे चले आये?आपने वैदिक साहित्य और संस्कृत का विधिवत अध्ययन किया है?
बचपन में स्थिति ऐसी नहीं थी एक दिन में दो बार भोजन मिल जाये तो हमारे लिए सब से खुशी की बात होती थी।तब ज्यादा बड़े सपने तो नहीं थ,े थोड़ी बहुत पढ़ाई लिखाई यदि हो जाये ताकि कोई ऐसा काम मिल जायेगा। नौकरी मिल जायेगी । परिवार का ठीक ठाक भरण पोषण हो जाये। भारतीय संस्कार और भारतीय संस्कृति की छाप परिवार के माध्यम से मेरे मन पर बहुत गहरी रही है। हम गरीब तो थे, आर्थिक रूप से गरीब थे लेकिन बौद्धिक रूप से नहीं। माँ योग किया करती थी घर में। हमें उन्होनें उस उर्जा से बचपन में परिचित कराया ।इस उर्जा ने भारतीय सनातन, भारतीय योग को हृदय में सही मायने में उतारा, फिर स्वाध्याय किया चेतना जगी, अपने शास्त्रों में उपनिषद को पढ़ा, योग शास्त्रों को खोजा और जाना योग की प्रखर ज्योति की ज्वाला को और कैसी प्रखर किया जा सके इस दिशा में निरंतर प्रयास, साधना और मनन,चिंतन तथा अध्ययन ने रुपांतरण किया।योग मानने जैसा पथ नहीं है योग जानने का पथ है।
चीन में योग के प्रति वहां के समाज की सोच कैसी है? चीन के अलग-अलग शहरों में योग के कितने केंद्र स्थापित कर चुके है?चीनी सरकार का योग के प्रति कितना समर्थन है?
चीन के समाज में हर अच्छी चीज ग्रहण करने की चाहत के कारण योग को सहज स्वीकार हो रहा है।चीन के जियामिन, शेनझेन, गुइयांग, नानचांग, लोंग येन आदि शहरों में 9 योग सेंटर चल रहे हैं। पिछले चार सालों में चीन के 178 शहरों में योग के कार्यक्रम कर चुका हूं।
सोहन योगा का मुख्यालय फुजियन प्रांत के जियामिन द्वीप में बनाया गया है, जो दक्षिण चीन में स्थित है। आज में यहाँ हूँ चीन में, यह कोशिश रहती है किसी भी स्टेज से किसी प्लेट फार्म से में बोलू भारतीय योग संपदा और भारतीय ध्वज को ऊँचा रखूं। में जहाँ भी जाऊँ, जिनके बीच भी रहूँ कुछ भी हो जाऊँ हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान यही मेरी पहचान है यहीं मेरा राष्ट्रधर्म, गुणधर्म का अहम हिस्सा है यह ऐसा अंग है जिसके बिना सब छिन्न-भिन्न लगता है।
सोहन योगा नाम देने का कारण क्या है?क्या अन्य योग से थोड़ा अलग है?
सोहन योगा नाम इस लिए दिया क्योंकि योग का ध्वज मेरे हाथ में है जुम्मेदारी मेरे ऊपर होगी कोई बड़ा फेन्सी नाम दे सकता था ।लोग उससे कनेक्ट होने में आसानी उतनी नहीं होती जितनी आज होती है । सोहन वो, जो सोहन योगा बाला सोहन है। योग में बहुत स्वाध्याय किया है योग में जिन चीजों को बाहर लाने की कोशिश की है। योग की वैसा ही को लोगों के सामने रखना है। योग कोई कथा कहानी नहीं है योग विज्ञान है अद्भुत विज्ञान को वैसा ही जैसा हमारे बुजुर्गों ने हमें दिया है। अनुभव पर आधारित विद्या है। 2017 में माननीय पी.एम. मोदी जी ब्रिक्स की मीटिंग में मेरे शहर जियामिन में आये थे। जियामिन मेरे शहर का नाम है । माननीय प्रधानमंत्री जी को अपने शहर में देखकर ऊर्जा का नया आभास हुआ उसके बाद ब्रिक्स के अलग-अलग फोरम पर योग का प्रतिनिधित्व किया पीपुल एक्सचेंज फोरम, चाइनीज इण्डिया डायलॉग फोरम सभी जगह मेरी कोशिश रही है योग के माध्यम से ऐसे प्लेट फार्म तैयार हो कि लोग भारतीय योग संपदा भारतीय संस्कृति और हमारी जो सोफ्ट पावर है उसे अच्छे से समझ सके।
सोहन योगा का दुनिया के कितने देशों तक विस्तार हो चुका है?सोहन योगा भारत में कोई केंद्र है?
सोहन योगा का कोई केन्द्र भारत में नहीं है। सोहन योगा के 30 योग केन्द्र भारत में खोलना चाहता हूँ। जम्मू कश्मीर को मिलाकर। जम्मू के युवा उसको मुफ्त में योग की शिक्षा देकर योग के प्रति रुझान पैदा करना चाहता हूँ।
उत्तर प्रदेश के ललितपुर के एक छोटे से गांव से निकल कर अब तक की यात्रा को देखकर संतुष्ट है?
में उ.प्र. के जिला ललितपुर के विरधा ब्लाक के बारखेड़ा गांव से आता हूँ। गांव से निकलने वाला आदमी जमीन के यथार्थ मूल्य से जुड़ा रहता हूं। जो काम कर रहा हूँ उसमें कार्यकुशलता हो देश और योग का ध्वज ऊंचा रहे। यात्रा अभी चल रही है देश और योग का नाम ऊपर रहे।गांव से निकल कर और यहां तक की यात्रा जारी है । मेरे जैसे हजारों लाखों करोड़ों बच्चे गाँव में है जिनके पास एक चड्डी होती है जैसी मेरे पास हुआ करती थी बुन्देली में मेरा एक दोहा है-
हर चकमक में आग है बार सके तो बार,
सुर सरगम लिपटाये है तार तार में सार।
संभावना सभी के अन्दर बराबर है बस जगाने की बात है योग बस यही चकमक की आग है।
मां ने बचपन में जो योग सिखाया उसके अलावा अन्य किसी गुरू से सीख है?विदेशी लोगों को भारतीय योग से जोड़ने के लिए किस प्रकार कार्य कर रहे है?योग मे आहार का क्या महत्व है?
माँ से बचपन से योग सीखने के बाद सागर विश्व विद्यालय से पीजीडीसीए योगा तथा योगा में मास्टर डिग्री प्राप्त की। भारतीय योग में शाकाहार तथा आयुर्वेद से़ विदेशी लोगों को भारतीय योग से जोड़ता हूँ ।मेरे जो फैन्स फोलिग है जहाँ भी कार्यक्रम होता मेरी कोशिश होती भोजन का जो अर्जमेन्ट हो शाकाहारी हो, शाकाहार भोजन के विचार का विदेशी लोगों के सामने निरंतर रखता हूँ एक हद तक हमें सफलता मिली है। लोगों ने जाना है शाकाहार हमारे शरीर के लिए कितना जरूरी हो। तामसी भोजन करेंगे तो तामसी गुण आते जायेगें सात्विक भोजन करेंगे तो सात्विक गुण आते चले जायेंगे इस बात को लोगों के सामने रखते है।
भारतीय योग के माध्यम से हिमालय पर आप योग दिवस पर कैसा कीर्तिमान बनाना चाहते है कृपया विस्तार से बताये? हिमालय पर जाने के लिए कब भारत आएंगे ?
भारत की तरह चीन के मशहूर टीवी शो में आप को बुलाया जाता है? आपको कितनी भाषा आती है?
चीन के इतिहास में कभी कोई योगा टीचर ने टी.वी. पर जाकर टी.वी. र्स्टास के रूप में योगा नहीं कराया हैं। मुझे यह सौभाग्य मिला कि पहला भारतीय टी.वी.योगा स्टार्स बनकर योगा कराया इस कार्यक्रम में 70 करोड़ लोगों ने हूनान टी.वी. से जुड़कर योग को देखा है। मुझे 9-10 भाषाऐं आती है जिनमें हिन्दी, अंग्रेजी चाईनीज, थाई, राशियन, यूक्रेनियन बेसिक स्पेनिश, उर्दू, बेसिक अरबी भाषा है। मेरी कोशिश है कि जितनी भाषा सीख सकूँ तो सीखूं ताकि भारतीय योग हर देश में पहुँचाने के लिए उनकी भाषा में योग पहुँचाऊ।
भारत विशेष तौर पर अपने गृह प्रदेश यूपी के लिए योग के माध्यम से किस तरह की परिकल्पना है?
भारत भूमि में उत्तर प्रदेश की भूधरा से प्रेम वैसा ही अनगढ़ हो जाता है। वहाँ मेरा जन्म हुआ उसी उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड की हवा पानी में पला बढ़ा हूँ। अपने गृह प्रदेश के लिए बहुत कुछ करना चाहता हूँ। वर्तमान उ.प्र. सरकार, वर्तमान आयुष मंत्रालय का सहयोग मिल जाये यूपी के 75 जिले में योग के अनूठें कार्यक्रम कर अपने यूपी के जो यूथ है, भारतीय यूथ को योग से जोड़ना चाहता हूँ । आप सब जानते है संस्कृत हमारी बोल चाल की भाषा थी लेकिन आज कर्मकांड की भाषा बन कर रह गयी है। हम उसे यूथ से नही जोड़ पाये। भारतीय योग यूथ के लिए बहुत कारगर है। आज हमारा यूथ लुम्बा सुम्बा और जिम करने में लगा है। उसे भारतीय योग की तरफ लेकर आऊँ। योग की वैज्ञानिकता मुझे सामर्थ देती है। जब मैं उसके सामने योग को विस्तार से रखूँगा वह जुड़ेगा एक अद्भुत ट्रांसमीशन योगा से हो सकेगा।
योग का परम लक्ष्य क्या है? अध्यात्म !
योग के सम्बन्ध में ढेरों परिभाषाऐं टीका टिप्पणी मिल जाती है। योग का परम लक्ष्य व्यक्ति का आंतरिक रूपांतरण, शरीर के साथ-साथ मन का एक हो जाना शरीर और मन दोनों एक हो जाये ऐसी स्थिति में आचार विचार और संचार तीनों का एकीकरण हो जाता है। फिर एक ऐसे मनुष्य की कल्पना सम्भव होती जहां हर चीज वैसी ही होती है। जैसी प्राकृतिक तरीके से होना चाहिए। योग के माध्यम से स्वस्थ शरीर, स्वस्थ चित निर्माण के साथ एक अच्छे राष्ट्र के निर्माण की परिकल्पना का लक्ष्य है। यूरोप में जर्मनी आस्ट्रेलिया में बहुत सारे लोग यह पूछते है कि भारत अध्यात्म का केंद्र रहा है सदा से । अगर अध्यात्म को पढ़ना है जानना है तो किसे पढ़ा जाये? गूगल पर देखते है तो इतना कुछ निकल कर आता है सामने की समझ में नहीं आता है कहाँ से शुरू करू? मैं उनको बताता हूँ । सनातन संस्कृति समझने शंकराचार्य से आप शुरू करें। द्वैत-अद्वैत के साथ आगे बढे़े स्वामी विवेकानन्द को समझे, स्वामी रामकृष्ण परमहंस को उनके गुरू तोतापुरी को। ईश्वरीय धारण के परे भगवत्ता को जानना है भारतीय अध्यात्मिकता की आत्मा हमारे उपनिषदो को पढ़े। एक सूत्र समझ में आ जाये तो जीवन की चेतना समझ में आ जाती है। योग के माध्यम से आगे बड़ने का पथ पतंजलि के बारे में बताता हूँ। एक सूत्र एक महाग्रंथ की रचना है। 9वां सूत्र शब्द ज्ञानानुपाति वस्तु शून्यो विकल्प। इस एक सूत्र में जैसे एक सिन्धु समाया है। फिर मैं लोगों को भारतीय अध्यात्म समाज की उस परम्परा जहां रस बरसा है वहां कबीर है दादू है रैदास है नानक है- नाम खुमारी नानका चढ़ी रहे दिन रात”
युवाओं के लिए आपकी क्या सीख है?
युवाओं से कहने के लिए बहुत कुछ है। मेरी कोशिश है विदेश में रहते हुए योग से इतने लोगों लाभप्रद किया है। तो अपने बच्चे अपने लोग अपनी मिट्टी के प्रति भी सर्मपण है और जुम्मेदारी भी है। मेरा सभी से अनुरोध है कि योग से जुड़िये योग में वजन नही उठाना पड़ता योग वजन उठाना नही सिखाता है। योग खुद के शरीर को उठाना सिखाता है। मन को उठाना सिखाता है।

