अरुण नामदेव हिंदी के जाने-माने कवि और लेखक हैं जिनकी रचनाओं में इंसान समाज लोकतंत्र और आज के दौर के सवालों की झलक मिलती है । के बहुचर्चित कविता संग्रह ” डाल डाल गिद्ध ” का इंदौर में आयोजित 14वें प्रांतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में देश-प्रदेश के शीर्ष साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया विमोचन।
मध्य प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) के दो दिवसीय 14वें प्रांतीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर शहडोल संभाग के अंतरराष्ट्रीय कवि अरुण नामदेव के कविता संग्रह ” डाल डाल गिद्ध ” का भव्य एवं गरिमापूर्ण विमोचन संपन्न हुआ। इंदौर स्थित ऐतिहासिक ‘चंद्रकांत देवताले – कृष्णकांत निलोसे मंच’ पर आयोजित इस दो दिवसीय समागम के प्रथम सत्र में “प्रतिरोध का अतीत और वर्तमान की चुनौतियाँ” विषयक गंभीर विमर्श के बीच देश के मूर्धन्य रचनाकारों ने कृति का लोकार्पण किया।
लोकार्पण समारोह के अवसर पर मंच पर प्रलेस केवरिष्ठ लेखक जितेंद्र भाटिया (मुंबई), शैला चित्रे (इंदौर), चर्चित कथाकार रणेन्द्र (रांची), हरिओम राजौरिया (अशोकनगर), वरिष्ठ कवि पवन करण (ग्वालियर), प्रलेस के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी (इंदौर) तथा प्रख्यात कवि कुमार अम्बुज (भोपाल) सहित देश-प्रदेश के शीर्ष साहित्यकरो की उपस्थित में राष्ट्रीय महासचिव प्रो. सुखदेव सिंह सिरसा (पंजाब विश्वविद्यालय), द्वारा किया गया अरुण नामदेव की काव्यकृति “डाल डाल गिद्ध “विमोचन ।
इसके अलावा सभागार में देश के विभिन्न अंचलों से आए प्रतिनिधि, साहित्यप्रेमी, बुद्धिजीवी व संस्कृतिकर्मी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी उपस्थित साहित्यकारों द्वारा लोकार्पित कृति का करतल ध्वनि से स्वागत किया गया।
अरुण नामदेव हिंदी के जाने-माने कवि और लेखक हैं जिनकी रचनाओं में इंसान समाज लोकतंत्र और आज के दौर के सवालों की झलक मिलती है ।
विमोचन अवसर पर प्रो. सुखदेव सिंह सिरसा सहित मंचासीन वक्ताओं ने कृति की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि " डाल डाल गिद्ध की कविताएं समकालीन सामाजिक-राजनीतिक परिवेश की विसंगतियों पर गहरा प्रहार करती हैं। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि लेखक ने अपने समय और समाज की कड़वी सच्चाइयों को अत्यंत निर्भीकता, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता के साथ साथ उजागर किया है। संग्रह की कविताएं पाठक को केवल आंदोलित ही नहीं करतीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण और सामाजिक चेतना के लिए प्रेरित भी करती हैं। मंचासीन अतिथियों ने श्री अरुण नामदेव को इस महत्वपूर्ण साहित्यिक अवदान के लिए बधाई देते हुए भविष्य में भी इसी सरोकार और ऊर्जा के साथ अनवरत लेखन जारी रखने हेतु शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
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