बैंक ने पूरे भारत में साइबर धोखाधड़ी के प्रति जागरूकता लाने के लिए 8,800 से अधिक कार्यशालाएं आयोजित कीं
मुंबई, 22 अक्टूबर, 2026: एचडीएफसी बैंक ने साइबर धोखाधड़ी को रोकने और ग्राहकों को जागरूक करने की अपनी प्रतिबद्धता के तहत, ‘साइबर फ्रॉड सुरक्षा’ नामक एक राष्ट्रव्यापी जागरूकता पहल के अंतर्गत 8,800 से अधिक कार्यशालाएं आयोजित कीं गई। ये कार्यशालाएं जुलाई से अक्टूबर 2026 के बीच आयोजित की गईं, जिनके माध्यम से बैंक ने देश भर के 1.8 लाख से अधिक नागरिकों तक पहुंच की है।
इस अभियान का उद्देश्य ग्राहकों और आम जनता को साइबर धोखाधड़ी के नए तरीकों के बारे में शिक्षित करना, सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देना और एक सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम बनाने में योगदान देना था।
इन कार्यशालाओं का लक्ष्य स्कूली और कॉलेज के छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), कॉर्पोरेट कार्यालयों, सामुदायिक समूहों, स्वयं सहायता समूहों, ग्राहकों और कर्मचारियों को जागरूक करना था। इन इंटरैक्टिव सत्रों के जरिए, प्रतिभागियों को सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली ताकि वे साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने से बच सकें।
इन कार्यशालाओं में वास्तविक जीवन के उदाहरण, कहानियां और वीडियो शामिल थे, जिनसे प्रतिभागियों को यह समझने में मदद मिली कि धोखाधड़ी करने वाले किस तरह के तौर-तरीकों ( मॉड्यूस ऑपरेंडी ) का इस्तेमाल करते हैं और उनसे कैसे सुरक्षित रहा जा सकता है।
कार्यशालाओं में डिजिटल सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया, जिससे लोगों को डिजिटल सुरक्षा की बेहतर समझ मिली:
1. साइबर धोखाधड़ी के प्रति जागरूकता: इसमें धोखाधड़ी के नए तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई, जैसे कि ‘डिजिटल अरेस्ट’, निवेश से जुड़ी धोखाधड़ी, नौकरी के नाम पर होने वाले घोटाले, एपीके फाइल स्कैम, क्यूआर कोड स्कैम आदि।
2. सुरक्षित नेट-बैंकिंग और शॉपिंग टिप्स: इन सत्रों में सुरक्षित ऑनलाइन लेनदेन के सर्वोत्तम तरीकों पर जोर दिया गया, ‘विजिल आंटी’ के महत्व को बताया गया और सुरक्षित ऑनलाइन शॉपिंग के लिए उपयोगी सुझाव दिए गए।
3. बचाव के उपाय: प्रतिभागियों को सलाह दी गई कि वे अपनी संवेदनशील जानकारी, जैसे कि ओटीपी , सीवीवी, डेबिट/क्रेडिट कार्ड की जानकारी और यूपीआई पिंन किसी के साथ साझा न करें।
एचडीएफसी बैंक के क्रेडिट इंटेलिजेंस एंड कंट्रोल विभाग के सीनियर एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट, श्री मनीष अग्रवाल ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, “साइबर अपराध एक गंभीर खतरा है। अक्सर जागरूकता की कमी के कारण लोग साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं। इसलिए, नागरिकों के बीच जागरूकता फैलाना बहुत जरूरी है। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को यह बताना था कि जालसाज किस तरह के तरीकों का इस्तेमाल करते हैं और उन्हें सुरक्षित बैंकिंग के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। इससे लोग सतर्क रहेंगे, धोखाधड़ी के तरीकों को पहचान सकेंगे और ऐसे घोटालों का शिकार होने से बच सकेंगे।”
बैंक अपने ग्राहकों को सलाह देता है कि वे डिजिटल लेनदेन करते समय सतर्क रहें, सुरक्षित बैंकिंग आदतें अपनाएं और अपनी गोपनीय बैंकिंग जानकारी किसी के साथ भी साझा न करें। यदि कोई ग्राहक धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है तो उसे तुरंत अपनी नजदीकी बैंक शाखा से संपर्क करना चाहिए और नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल की हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए।

